बदलने वाला है झारखंड के सरकारी स्कूलों के पोशाक का रंग, अब ऐसा देगा दिखाई

Published by : Sameer Oraon Updated At : 20 Jul 2022 9:17 AM

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झारखंड के सरकारी स्कूलों पढ़ने वाले बच्चों के पोशाक का रंग बदलने वाला है. अब इसका रंग हरा और नीला कलर का होने वाला है. कक्षा 1 से 5 तक के लिए अगल ड्रेस की व्यवस्था है तो कक्षा छह से आठ तक के लिए अलग.

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रांची : राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों की पोशाक के रंग अब बदले जायेंगे. झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से इस संबंध में सभी जिलों को दिशा-निर्देश भेजा गया है. परियोजना की ओर से जिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 से नये रंग की पोशाक उपलब्ध कराये जायेंगे. जिलों को भेजे गये पत्र में कहा गया है फिलहाल स्वेटर का रंग निर्धारित नहीं किया गया है. स्वेटर का रंग निर्धारित होने के बाद जिलों को अलग से जानकारी दी जायेगी. उल्लेखनीय है कि पोशाक के लिए जिलों को राशि उपलब्ध करा दी गयी है.

2015-16 में बदला था पोशाक का रंग :

राज्य में इससे पहले वर्ष 2015-16 में पोशाक के रंग में बदलाव किया गया था. वर्तमान में बच्चों की पोशाक में पैंट का रंग मैरून व शर्ट का क्रीम कलर था. बच्चे वर्तमान में इसी रंग की पोशाक पहनते थे.

हरी-नीली होगी स्कूली बच्चों की पोशाक

कक्षा एक से पांच

छात्र : पैंट नीला व शर्ट पिंक(ब्लू पाइपिंग सहित)

छात्राएं : स्कर्ट नीला व शर्ट पिंक(ब्लू पाइरिंग सहित)

कक्षा छह से आठ

छात्र : पैंट हरा व शर्ट हरा एवं सफेद चेक व हरा रंग का कॉलर सहित

छात्राएं: सलवार एवं दुपट्टा हरे रंग का एवं कुर्ता सफेद चेक व हरे रंग का कॉलर सहित

जिलों से चार वर्षों में बच्चों को दी गयी पोशाक की मांगी रिपोर्ट

राज्य में स्कूली बच्चों के पिछले चार वर्षों के दौरान हुए पोशाक वितरण की रिपोर्ट जिलों से मांगी गयी है. झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक को इसे लेकर पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि कक्षा एक से आठ तक विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा एवं राज्य योजना के तहत बच्चों को पोशाक उपलब्ध करायी जाती है.

पोशाक के लिए राशि डीबीटी की जाती है. वहीं एसएचजी एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से पोशाक उपलब्ध करायी जाती है. शिक्षा परियोजना ने सभी जिलों से वर्ष 2018-19 से वर्ष 2020-21 तक एसएचजी, डीबीटी एवं विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से कितने बच्चों को पोशाक दी गयी और कितने को नहीं मिल पायी, इसकी जानकारी मांगी है. वहीं बच्चों को पोशाक नहीं मिलने के कारण की भी जानकारी देने को कहा है. वहीं जिलों से बच्चों के बैंक खाता खोले जाने की स्थिति की भी जानकारी देने को कहा गया है.

डीबीटी के बाद पोशाक क्रय का होगा सर्वे :

जिन बच्चों को पोशाक के लिए राशि डीबीटी के माध्यम से दी गयी उन्होंने पोशाक खरीदी या नहीं, इसका सर्वे करने को कहा गया है. सर्वे का कार्य बीआरपी-सीआरपी के माध्यम से कराने को कहा गया है.

Posted By: Sameer Oraon

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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