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जनांदोलन में पुलिस लाठीचार्ज व दर्ज मुकदमों की न्यायिक जांच हो, राज्यपाल से भाजपा नेताओं ने की मुलाकात

Updated at : 16 Apr 2023 5:38 AM (IST)
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जनांदोलन में पुलिस लाठीचार्ज व दर्ज मुकदमों की न्यायिक जांच हो, राज्यपाल से भाजपा नेताओं ने की मुलाकात

भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर बताया गया कि प्रदेश भाजपा लगातार हेमंत सरकार की विफलताओं, नाकामियों को उजागर करती रही है

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प्रदेश भाजपा की ओर से 11 अप्रैल को आयोजित सचिवालय घेराव कार्यक्रम में हुई पुलिसिया कार्रवाई, लाठीचार्ज, नेताओं कार्यकर्ताओं पर हुए मुकदमों की न्यायिक जांच करा कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दीपक प्रकाश, भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास, प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा व बालमुकुंद सहाय शामिल थे.

भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर बताया गया कि प्रदेश भाजपा लगातार हेमंत सरकार की विफलताओं, नाकामियों को उजागर करती रही है. पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने जनता की भावनाओं के अनुरूप हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही झामुमो, कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार की जनविरोधी नीतियों, वादा खिलाफी को सड़क से सदन तक लगातार उजागर किया है.

राज्य में किस प्रकार से केंद्रीय जांच एजेंसियों के द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर मामले आये दिन उजागर हो रहे हैं. राज्य के लिए शर्मनाक स्थिति यह है कि भ्रष्टाचार के मामले में स्वयं मुख्यमंत्री, उनके परिजन, सहयोगियों के साथ कई वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर हुई है. राज्य सरकार की नीतियों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार की नीयत में ही खोट है.

यह सरकार राज्य का विकास नहीं करना चाहती, बल्कि अपने परिजनों और चहेतों को केवल खनिज संसाधनों और राज्य के खजाने को लूटने की छूट देना चाहती है. राज्य सरकार की तुष्टीकरण नीति का परिणाम है कि राज्य के अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदाय के बीच दूरियां बढ़ रही हैं. बहुसंख्यक समाज के पर्व त्योहारों, सांस्कृतिक उत्सवों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है.

पिछले दिनों जमशेदपुर में दो समुदायों के बीच हुए तनाव, भाजपा नेताओं की गिरफ्तारी राज्य सरकार की तुष्टीकरण नीति को ही उजागर करते हैं. बताया गया कि प्रदेश भाजपा ने कई सांगठनिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य सरकार की नाकामियों एवम जन विरोधी नीतियों को उजागर किया है. पार्टी द्वारा राज्य के सभी 264 प्रखंडो एवं 24 जिलों की सांगठनिक इकाइयों ने अपने-अपने प्रखंडों, जिलों में जोरदार प्रदर्शन किये.

इसके बाद प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन की घोषणा की थी. हेमंत सरकार भाजपा के आंदोलन से डरी-सहमी है. इसलिए भाजपा के हर आंदोलन को सत्ता का दुरुपयोग करते हुए कुचलने की कोशिश करती रही है. सचिवालय घेराव कार्यक्रम में तो हेमंत सरकार ने हिटलरशाही सोच की पराकाष्ठा कर दी. हेमंत सरकार ने अपने खिलाफ हो रहे जनांदोलनों को कुचलने की नयी परंपरा शुरू की है. यह सरकार आंदोलनकारियों को अपराधी मानती है.

आंदोलन के एक दिन पूर्व सभी जिलों में सरकारी आदेश जारी कर 10 अप्रैल को दो बजे से 11 अप्रैल को दो बजे तक एंटी क्राइम चेकिंग के नाम पर प्रदर्शन में आने वाले नेताओं, वाहन चालकों, मालिकों एवं आम जनता को थाना प्रभारियों द्वारा डराया धमकाया गया. रैली में आ रहे वाहनों की पूरे रास्ते में जगह-जगह चेकिंग की गयी, ताकि जन सैलाब राजधानी रांची तक नहीं पहुंच सके.

रैली के एक दिन पूर्व झामुमो नेता की प्रेसवार्ता में सत्ता का अहंकार और जनांदोलन का भय स्पष्ट उजागर हुआ. बावजूद इसके प्रदेश भाजपा द्वारा आयोजित सचिवालय घेराव कार्यक्रम पूरी तरह लोकतांत्रिक था. लोकतंत्र में सत्ता की विफलताओं, नाकामियों को उजागर करना विपक्ष का धर्म है, जिसका पालन लोकतांत्रिक तरीके से भाजपा ने किया है.

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