Maha Shivratri 2021 : रामगढ़ के टूटी झरना प्राचीन शिव मंदिर के शिवलिंग पर सालों भर होता जलाभिषेक, नाग देवता का भी होता है दर्शन

Maha Shivratri 2021, Jharkhand News, Ramgarh News, कुजू न्यूज : रामगढ़ शहर से 8 किलोमीटर दूर पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. प्राचीन शिव मंदिर को लोग टूटी झरना के नाम से जानते हैं. मंदिर कब से है और इसका निर्माण कैसे हुआ ये किसी को भी नहीं हैं पता. हालांकि, लोग बताते हैं कि सन 1925 में अंग्रेज इस इलाके से रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रहे थे. पानी के लिए खुदाई के दौरान गुंबदनुमा आकृति दिखाई पड़ा. अंग्रेजों ने इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करायी तब जाकर मंदिर का पूरा स्वरूप दिखा. साथ ही मंदिर के अंदर भगवान भोले के शिवलिंग आकृति और उसके ठीक ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा भी मिली. प्रतिमा की नाभी से आपरूपी जल का प्रवाह जो शिवलिंग पर गिरता रहता है. मंदिर के अंदर मां गंगा के प्रतिमा से स्वयं पानी निकलना अपने आप में एक रहस्य का विषय है.
Maha Shivratri 2021, Jharkhand News, Ramgarh News, कुजू न्यूज (धनेश्वर प्रसाद) : रामगढ़ शहर से 8 किलोमीटर दूर पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर टूटी झरना श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. मंदिर के गर्भगृह में अवस्थित शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक स्वयं मां गंगा करती है. इस शिवलिंग पर जलाभिषेक बारह महीनों और 24 घंटे होते रहता है. ऐसे तो प्रत्येक दिन सैकड़ों की संख्या में लोग पूजा- अर्चना करने यहां पहुंचते हैं, लेकिन सावन का महीना व शिवरात्रि में यहां का नजारा देखते ही बनता है. शिव मंदिर की महत्ता व आस्था को लेकर हजारों की तदाद में लोग पूजा- पाठ के लिए पहुंचे हैं. जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है. श्रद्धालुओं का मानना है कि दर्शन मात्र से ही हर मन्नत पूरी हो जाती है.
प्राचीन शिव मंदिर को लोग टूटी झरना के नाम से जानते हैं. मंदिर कब से है और इसका निर्माण कैसे हुआ ये किसी को भी नहीं हैं पता. हालांकि, लोग बताते हैं कि सन 1925 में अंग्रेज इस इलाके से रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रहे थे. पानी के लिए खुदाई के दौरान गुंबदनुमा आकृति दिखाई पड़ा. अंग्रेजों ने इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करायी तब जाकर मंदिर का पूरा स्वरूप दिखा. साथ ही मंदिर के अंदर भगवान भोले के शिवलिंग आकृति और उसके ठीक ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा भी मिली. प्रतिमा की नाभी से आपरूपी जल का प्रवाह जो शिवलिंग पर गिरता रहता है. मंदिर के अंदर मां गंगा के प्रतिमा से स्वयं पानी निकलना अपने आप में एक रहस्य का विषय है.
पानी अपने आप कहां से आ रहा है यह बात अभी तक रहस्यमय बनी हुई है. कहा जाता है कि भगवान शंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं मां गंगा स्वयं करती है. वैज्ञानिकों ने भी जानने का प्रयास किया पर वे भी असफल रहे. मंदिर के वर्तमान पुजारी उमेश पांडेय श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना कराते हैं और उनका भी मानना है कि मंदिर के दर्शन मात्र से ही लोगों की मनोकामना पूरी होती है.
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मंदिर के ठीक पूर्वी छोर पर करीब 50 मीटर दूरी पर एक हैंडपंप भी लगा है, जो रहस्य से भी घिरा है. यहां लोगों को पानी के लिए हैंड पंप चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि इसमें से अपने आप हमेशा पानी नीचे गिरता रहता है. जिसे लोग पूजा- अर्चना के साथ स्नान करने में इस्तेमाल भी करते हैं. वहीं, मंदिर के पास से ही एक नदी गुजरती है जिसमें पानी नहीं के बराबर रहता है. यह नदी गर्मी के दिनों में पूरी तरह सूख जाती है, लेकिन भीषण गर्मी में भी इस हैंडपंप से खुद पानी चौबीसों घंटा गिरता रहता है.
मंदिर के गर्भगृह में जहां भगवान भोले शंकर का शिवलिंग स्थापित है वहां पर सालों भर नाग देवता का दर्शन श्रद्धालुओं को होता रहता है. समय- समय पर यह नाग देवता शिवलिंग से लिपट कर अठखेलियां करते दिखाई देते हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय बना रहता है. इस बीच जो नाग देवता दर्शन कर लेते हैं वे अपने आप को परम सौभाग्यशाली समझते हैं.
Posted By : Samir Ranjan.
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