Rajasthan Election 2023 : 'बीजेपी ने रमेश बिधूड़ी को दिया नफरत फैलाने का इनाम', जानें क्यों भड़के दानिश अली
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 28 Sep 2023 5:10 PM
Rajasthan Election 2023 : बसपा सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग अब तक नफरत सड़क पर फैला रहे थे, वही काम उन्होंने (बिधूड़ी ने) लोकतंत्र के मंदिर में किया. जानें क्यों बीजेपर पर भड़के दानिश अली....
Rajasthan Election 2023 : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर विवादों में घिरे लोकसभा सदस्य रमेश बिधूड़ी को राजस्थान के टोंक जिले में चुनाव संबंधी जिम्मेदारी दी गई है. मामले को लेकर विपक्षी दलों ने बीजेपी पर निशाना साधा है. इस बीच सांसद दानिश अली ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले लोकसभा सदस्य रमेश बिधूड़ी को राजस्थान के टोंक जिले में चुनाव की जिम्मेदारी सौंपकर नफरत का इनाम बीजेपी की ओर से दिया गया है. लेकिन साथ ही उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भाजपा सांसद के खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगे. जिले में बड़ी संख्या में गुर्जर आबादी होने की वजह से बीजेपी मानती है कि बिधूड़ी गुर्जर वोट उसके पक्ष में लाने में सक्षम हैं हैं क्योंकि बिधूड़ी भी गुर्जर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. आपको बता दें कि इस जिले में विधानसभा की चार सीट हैं जिनमें से एक सीट टोंक का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट कर रहे हैं. कांग्रेस के दिग्गज नेता पायलट भी गुर्जर समुदाय से हैं. इस साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले बीजेपर और कांग्रेस ने कमर कस ली है. जहां बीजेपी चुनाव जीतने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. वहीं कांग्रेस के ने कह रहे हैं कि इस बार ट्रेंड टूटेगा और कांग्रेस एक बार फिर सरकार बनाएगी.
बीजेपी का चाल चरित्र, चेहरा बेनकाब: दानिश अली
बीजेपी के इस कदम के बारे में पूछे जाने पर दानिश अली ने कहा कि कम से कम थोड़ी मर्यादा तो रखनी चाहिए थी. खुद को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाली बीजेपी से जनता इतनी उम्मीद करती है कि यदि उसने कारण बताओ नोटिस जारी किया था तो यह भी सार्वजनिक कर देती कि जवाब क्या है या फिर सीधा कह दे कि हम नफरत को जायज ठहराते हैं और इसका इनाम देते हैं. बसपा सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग अब तक नफरत सड़क पर फैला रहे थे, वही काम उन्होंने (बिधूड़ी ने) लोकतंत्र के मंदिर में किया. आप नफरत का ईनाम दे रहे हैं. बीजेपी का चाल चरित्र, चेहरा बेनकाब हो गया. अली के अनुसार, बीजेपी के लोग समझते हैं कि इस कदम से वे बहुसंख्यक समाज के मतों को एकजुट कर लेंगे, ऐसा नहीं होगा क्योंकि देश के आम लोग इस तरह की भाषा को कभी स्वीकार नहीं करते.
लोकसभा अध्यक्ष ने मामले में सांसदों की शिकायतों को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा
इस बीच खबर है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसद दानिश अली के खिलाफ बीजेपी के सदस्य रमेश बिधूड़ी द्वारा आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल से संबंधित विपक्ष एवं सत्तापक्ष के कई सांसदों की शिकायतों को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया है. गौर हो कि लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार, द्रमुक सांसद कनिमोई और विपक्ष के कई अन्य सदस्यों ने बिरला को पत्र लिखकर बिधूड़ी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. इन सांसदों ने मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का भी आग्रह किया था.
क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि ‘चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां’ विषय पर लोकसभा में चर्चा के दौरान गत 21 सितंबर को रमेश बिधूड़ी ने बसपा के सांसद दानिश अली के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था. दूसरी तरफ, बीजेपी सांसदों निशिकांत दुबे और रवि किशन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दावा किया था कि पहले अली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का आग्रह किया था.
भाषा इनपुट के साथ
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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