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Meghalaya Tribes: मेघालय की ऐसी जनजातियां जहां सबसे छोटी बेटी होती है संपत्ति की वारिस

Updated at : 08 Apr 2025 10:52 AM (IST)
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Meghalaya Tribes: मेघालय की ऐसी जनजातियां जहां सबसे छोटी बेटी होती है संपत्ति की वारिस

Meghalaya Tribes: भारत के सुदूर उत्तर पूर्व ऐसी जनजातियां भी हैं, जहां महिलाएं संपत्ति की वारिस होती हैं. उनका वंश मां के नाम से चलता है. पारंपरिक कानून मातृसत्तात्मक हैं. खासबात ये है कि सबसे छोटी बेटी को मां से संपत्ति विरासत में मिलती है.

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Meghalaya Tribes: भारतीय समाज पितृसत्तात्मक है. यहां पिता की संपत्ति में पहले बेटे का हक माना गया है. लेकिन कोर्ट के फैसलों के बाद अब बेटी को भी पिता की संपत्ति में बराबर का मिलने लगा है. हालांकि अभी भी उन्हें इसके लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है. लेकिन भारत का एक राज्य है मेघालय है. जहां इस पितृसत्तात्मक समाज की व्यवस्था को चुनौती दी गई है. यहां महिलाओं को पुरुषों से अधिक महत्व दिया गया है. ये समाज है खासी. खासी का हिंदी में अर्थ है सात झोपड़ियां.

म्यांमार से आए मेघालय

वैसे तो मेघालय में खासी, जयंतिया और गारो तीन जनजातियां हैं. लेकिन मेघालय की कुल आबादी का लगभग आधा हिस्सा खासी जनजाति का है. ये खासी पहाड़ियों में निवास करते हैं. खासी प्रोटो ऑस्ट्रोलॉयड मोन खमेर जाति से निकले हैं, जो म्यांमार से असम और मेघालय के विभिन्न जिलों में आकर बसे थे. इस जनजाति की भाषा भी खासी है. जो एक ऑस्ट्रो एशियाई भाषा है. यह मोन खमेर भाषा समूह का एक हिस्सा है. इस जनजाति में पनार, भोई, वार, लिंग्ग्नम उप जनजातियां हैं. जो भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे पहले बसने वालों में से एक माने जाते हैं. हालांकि वर्तमान में इस समाज के अधिकतर लोग ईसाई धर्म को अपना चुके हैं. ऐसे में अपने आदिवासी धर्म का पालन करने वाले कम ही बचे हैं.

शादी के बाद पुरुष जाता है पत्नी के घर

खासी की तरह ही मेघालय की गारो जनजाति भी मातृसत्तात्मक है. महिलाएं संपत्ति की मालिक होती हैं. इनके वंश का पता भी मां से चलता है. गारो मेघालय का दूसरा सबसे बड़ा आदिवासी समाज है. कुल जनसंख्या का एक तिहाई गारो हैं. ये गारो भाषा बोलते हैं. मेघालय में ये तिब्ब्त से आए थे. इस जनजाति में विवाह होने के बाद पुरुष अपनी पत्नी के घर जाता है. इस जनजाति के लोग भी ईसाई धर्म को अपनाते जा रहे हैं. संगीत और नृत्य इन्हें पसंद है. वंगाला इनका प्रमुख त्यौहार है, जो फसल की कटाई के बाद अक्तूबर में मनाया जाता है. इस त्यौहार में ये अपने देवता सालिजोंग को धन्यवाद देते हैं.

जयंतिया जनजाति में मां प्रमुख

जयंतिया मूल रूप से असम से आए हैं. जयंतिया असम का शक्तिशाली राज्य था. 26 फरवरी 1826 को ब्रिटिश सरकार और बर्मी लोगों के बीच संधि हुई थी. इसके बाद 15 मार्च 1835 को अंग्रेजों ने जयंतिया राज्य पर कब्जाकर लिया था. वर्तमान में जयंतिया जनजाति जयंतिया हिल्स, एनसी हिल्स और असम के कार्बी आंगलोंग जिले में मिलते हैं. ये भी मातृवंशीय परंपरा को मानते हैं. पारिवारिक संपत्ति बेटियों को मिलती है और सबसे छोटी बेटी पारिवारिक संपत्ति की मुख्य रूप से देखभाल करती है. इनमें भी विवाह के बाद पुरुष पत्नी के घर जाता है. इनका त्यौहार भी मुख्य रूप से कृषि है. जयंतिया भी जल, जंगल, जमीन की पूजा करते हैं. इस जनजाति में मां प्रमुख होती है. फिर मामा का स्थान होता है.

पुरुषों से मिल रही चुनौती

खासी जनजाति में वर्षों से मातृसत्तात्मक व्यवस्था भले ही लागू हो लेकिन उन्हें समय-समय पर पुरुषों से चुनौती मिलती रहती है. मशहूर लेखर राफेल वारजरी ने अपनी किताब ‘एमईआई: मैट्रिलिनियल एक्सोगैमस इंस्टीट्यूशन’ (Matrilineal Exagamous Institution) में लिखा है कि खासी परंपराओं के बदलाव और उन्हें संरक्षित करने के पर चर्चा की है. पीटीआई के साथ अपने एक साक्षात्कार में राफेल वारजरी ने बताया है कि खासी महिलाओं को कबीले के नाम और पैतृक संपत्ति विरासत में मिलती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें पूरा अधिकार मिलता है. क्योंकि सत्ता परिवार और कबीले परिषद के पास होती है, जिसका नेतृत्व सबसे बड़े मामा करते हैं. परिवार में महिलाओं की मुख्य भूमिका के बावजूद, उन्हें नेतृत्व के पदों पर दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है. खासतौर से पारंपरिक शासन निकायों जैसे दोरबार श्नोंग (ग्राम परिषद) और ‘दोरबार हिमा’ (मुखिया परिषद) में निर्णय लेने की शक्ति मुख्य रूप से पुरुषों के पास होती है.

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Amit Yadav

लेखक के बारे में

By Amit Yadav

UP Head (Asst. Editor)

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