ePaper

Janmashtami 2025 : उर्दू शायरी में श्री कृष्ण और अपना भारत

Updated at : 15 Aug 2025 2:16 PM (IST)
विज्ञापन
sri Krishna

श्रीकृष्ण

Janmashtami 2025 : भारत में हिंदू देवी देवताओं की तारीफ में काव्य रचना करने वाले मुस्लिम शायरों में मौलाना हसरत मोहानी का नाम भी लिया जाता है.मौलाना हसरत मोहानी वही स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्हों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था.मौलाना हसरत मोहानी श्री कृष्ण को हजरत कृष्ण कहते थे.

विज्ञापन

-तहसीन मुनव्वर-

Janmashtami 2025 : भारत की अभी हाल ही में ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ जीत में सिराज और कृष्णा की जोड़ी ने इतिहास रचने का काम किया है.भारत की जीत को लेकर देश के सभी लीडर्स ने सिराज के साथ- साथ कृष्णा की भी प्रशंसा की.लेकिन सब से अधिक अगर किसी को भारत वासियों का प्यार मिला तो वो सिराज हैं.सिराज की जीत को लेकर एमआईएम प्रमुख सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उन की भरपूर तारीफ की लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ जैसे एक प्रकार से उन्हें हैदराबाद तक ही सीमित करने की कोशिश की.उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा ‘हमेशा ही विजेता, जैसे हम हैदराबाद में बोलते हैं कि, पूरा खोल दिए पाशा’.

सिराज की प्रशंसा करने से आप को कोई नहीं रोकता है लेकिन न जाने क्यों इस पोस्ट से ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि आप एक राष्ट्रीय धरोहर को केवल अपनी गली तक सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं.अगर ऐसा है तो फिर सिराज की पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है.यही सोच हमें पूरी तरह से घुलने मिलने नहीं देती.ऐसा केवल एक ही तरफ की सोच हो ऐसा भी नहीं है.जैसे ही कोई खिलाड़ी बड़ा पदक प्राप्त करता है और तिरंगे की शान बढ़ाता है हम उसे या तो जाति धर्म या फिर क्षेत्र में बांटने लग जाते हैं.ऐसा करते हुए हम भूल जाते हैं कि जो भारत की शान हैं वह किसी एक धर्म क्षेत्र जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करते.वह तो पूरे भारत के हैं.भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने जिस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया वह दर्शाता है कि जो भारत के सच्चे सपूत होते हैं उन्हें इस देश की आत्मा सिर आंखों पर बिठाती है.

लेकिन हमारी संकीर्ण सोच हमें चिंतन के स्तर पर ऊंचा उठने नहीं देती.मेरा हमेशा मानना रहा है कि हर देश की एक आत्मा होती है.भारत की आत्मा विविधता में एकता में बसी है.अध्यात्म हमारी आत्मा का सार है.अभी पिछलों दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में इसी ओर ध्यान आकर्षित करवाते हुए कहा था कि दुनिया में कई अमीर देश हैं.हम 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन भी जाएं तो यह दुनिया में कोई नई बात नहीं होगी.कई ऐसे काम हैं जो दूसरे देशों ने किए हैं, हम भी कर लेंगे लेकिन दुनिया के पास अध्यात्म और धर्म नहीं है जो हमारे पास है.उनका कहना सच है क्योंकि भारत की शक्ति आध्यात्मिक और उस धार्मिक चिंतन में है जो वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी पृथ्वी को एक परिवार के रूप में देखता है.

जहां तक धर्म की बात है तो कोई भी धर्म आप को भटकाने के लिए नहीं आया है.धर्म का मर्म ही मानव सेवा और आपसी सामंजस्य है.धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं है.हमें केवल उन लोगों को और उनकी ही सुनना चाहिए जो धर्म को आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता को बढ़ावा देने के लिए आगे बढ़ाते हों.इसी प्रकार धर्म से जुड़े जो देवी देवता या सम्मानित महान मजहबी देवपुरुष आदि हैं वह किसी एक धर्म के लोगों को मार्ग दिखाने नहीं आए थे बल्कि वह तो पूरी मानवता का मार्गदर्शन करने वाले थे.यही कारण है कि जो सत्य को पहचानते हैं, वह हर धर्म के महपुरुषों का सम्मान करते हैं.इस मामले में लेखकों और शायरों में यह अधिक देखने को मिलता है कि वह जहां अपने धर्म के महापुरुषों को लेकर लिखते हैं वहीं दूसरे धर्मों के महापुरुषों के लिए भी उनकी लेखनी से श्रद्धा के पुष्प अर्पण होते रहते हैं.

भारत में हिंदू देवी देवताओं की तारीफ में काव्य रचना करने वाले मुस्लिम शायरों में मौलाना हसरत मोहानी का नाम भी लिया जाता है.मौलाना हसरत मोहानी वही स्वतंत्रता सेनानी हैं जिन्हों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था.मौलाना हसरत मोहानी श्री कृष्ण को हजरत कृष्ण कहते थे.उन्हें बहुत मानते थे.उन्होंने श्री कृष्ण पर बहुत रचनाएं लिखी हैं;
हसरत की भी कबूल हो मथुरा में हाजिरी
सुनते हैं आशिकों पे तुम्हारा करम है खास
मौलाना हसरत मोहानी की श्री कृष्ण पर एक कविता है जिस में कहते हैं;
पैगाम-ए-हयात-ए-जावेदां था
हर नगमा कृष्ण बांसुरी का


भारत सूफी संतों की धरती है.यहां सूफी संतों ने आपसी प्रेम को बढ़ावा दिया और सभी धर्मों को अपनी दिव्य दृष्टि से देखा.उन्हें संकीर्ण सोच के दायरे में नहीं आने दिया.इस लिए हम देखते हैं कि हर धर्म में दूसरे धर्म के प्रति आदर भाव दिखाई देता है.अगर हम पैगंबर साहब पर 450 से अधिक हिंदू शायरों की रचना ‘हमारे रसूल’ नामक पुस्तक में देखते हैं, तो हिंदू देवी देवताओं पर मुस्लिम कवियों को भी लिखता पाते हैं.अल्लामा इकबाल की शायरी के बारे में तो कहा जाता है कि वह भर्तृहरि तथा श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन से अधिक प्रभावित है;
फूल की पत्ती से कट सकता है हीरे का जिगर
मरद-ए-नादां पर कलाम-ए-नरम-ओ-नाज़ुक बेअसर
इकबाल के बहुत से शेरों में हमें गीता के उपदेश सांस लेते महसूस होते हैं;
यक़ीं मोहकम, अमल पैहम, मुहब्बत फ़ातिह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें
जैसा कि पहले भी कहा गया है कि भारत सूफियों संतों की धरती है. रेखता ने अपनी साइट पर कई ऐसे सूफी शायरों का कलाम रखा है जिन्हों ने श्री कृष्ण पर शेर कहे हैं.उन में कुछ शेर देखिए;
‘औघट’ रहो प्रेम के भगती जब तक घट में प्राण
पूजा करो कृष्ण का और जमुना में अश्नान
(औघट शाह वारसी)
गोकुल की सी नागरी मथुरा का सा गांव
तुम हो मालिक बृज के कृष्ण तुम्हारा नांव
(मुज़्तर ख़ैराबादी)
बलदेव जसोदा नंद कहूँ
तैनूँ किशन कनहैया कान कहूँ
(ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद)
तुम चतुराई कोऊ जान न पाई
कोऊ छल बल संसार लुभाई
मथुरा छाँड बिरहा जग बोयो
कूबर कुल बिंदराबन छाई
(अमीनुद्दीन वारसी)


ऐसा नहीं है कि भगवान श्री कृष्ण को लेकर मुस्लिम कवियों ने हाल ही में लिखा हो.कई शताब्दी पहले से ही श्री कृष्ण पर लोग लिखते रहे हैं.केवल रसखान या रहीमन को ही नहीं देखें तो बहुत से और भी कवि रहे हैं जिन्हों ने कृष्ण भक्ति की शायरी की है.इंटरनेट पर उर्दू में ऐसे बहुत से लेख मिल जाते हैं जिन से पता चलता है कि सोलहवीं शताब्दी में शाह बदर उद्दीन जानम, अठारवीं शताब्दी में शाह तय्यब चिशती, वली दक्कनी और बाद में आलम शेख़ की शायरी में भी श्री कृष्ण पर शायरी मोजूद है.हफ़ीज़ जालंधरी की ‘कृष्ण कनहिया’ तथा वाजिद अली शाह की ‘रास लीला’ भी श्री कृष्ण के प्रेम में रची बसी है.


एक नाम तो हम छोड़ ही नहीं सकते वो है नज़ीर अकबराबादी का जिन की पूरी शायरी भारत के सभी रंगों में रंगी हुई है.‘जन्म कनहिया जी’, ‘कनहिया जी की शादी’ और ‘कनहिया जी का रास’ जैसी उनकी कविताएं आज भी पढ़ी जाती हैं;
मोहन मदन गोपाल हरी बंस मन हरण
बलिहारी उनके नाम ये मेरा तन बदन
गिरधारी नंद लाल हरी नाथ गोवर्धन
लाखों किए बनाओ हज़ारों किए जतन
एक और नाम मोहसिन काकोरवी का भी है जिन्हों ने पैग़म्बर साहब पर लिखी नात शरीफ में जिस प्रकार मथुरा की चर्चा की है उर्दू वाले इसे सदा उपयोग करते रहते हैं;
देखिए होगा सिरी किशन का क्यों कर दर्शन
सीना-ए-तंग में दिल गोपियों का है बेकल
सिम्ते काशी से चला जानिबे मथुरा बादल
तैरता है कभी गंगा कभी जमुना बादल
मोहसिन काकोरवी के ही रास्ते पर चलते हुए काकोरी के ही एक शायर शाह क़ाज़िम अब्बासी काकोरवी ने भी श्री कृष्ण के इश्क़ में डूब कर शेर कहे हैं;
कहाँ गए बृज लाल बसइया
मन मोहिनी बंसी के बजइया
कहाँ छुपी जाये मोहिनी मूरतिया
सगरे नगर के मन के छलइया


श्री कृष्ण और गीता उर्दू शायरी को हमेशा से ही अपनी ओर खींचते रहे हैं.मुझे इंटरनेट पर घूमते हुए पाकिस्तान की बड़ी कवीयत्री परवीन शाकिर का श्री कृष्ण पर केंद्रित कलाम भी मिला है.परवीन शाकिर भारतीय उपमहाद्वीप की नारी की संवेदनाओं को अपनी शायरी में ढालती रहीं हैं.लेकिन उनका श्री कृष्ण पर यह कलाम देख कर आप चोंक जाएंगे;
तू है राधा अपने कृष्ण की
तेरा कोई भी होता नाम
मुरली तेरे भीतर बाजती
किसी बन करती बिसराम
या कोई सिंघासन बिराजती
तुझे खोज ही लेते श्याम
श्री कृष्ण पर कुछ और शायरों का भी कलाम देखिए;
दिलों में रंग मुहब्बत का उस्तावर किया
सवादे हिंद को गीता से नग़मा बार किया
(सीमाब अकबराबादी)
एक प्रेम पुजारी आया है चरणों में ध्यान लगाने को
भगवान तुम्हारी मूरत पर श्रधा के फूल चढ़ाने को
(आफ़ताब रईस पानीपती)
कृष्ण‌ कनहिया आन बिराजे मोरे मन के मंदिर में
भगवन मोरे साथ हैं अब तो द्वार खुले हैं दर्पण के
(अब्दुल्लाह हादी काविश)
मेरा काबा मेरा शिवाला देवकी नंदन आप ही हैं
मेरा तो हर एक हवाला देवकी नंदन आप ही हैं
वृंदावन से चंबल तक जो गाय चराने आता था
नंद का वो गिरधर गोपाला देवकी नंदन आप ही हैं
(शाहिद अंजुम)
अंत में उन सभी के आभार के साथ कि जिन के लेख से इस लेख की राह आसान हुई अपने दो शेर भी प्रस्तुत करता चलूँ.
किशन मुरारी, कुंज बिहारी, गोवर्धन, गोपाला रे
बंसी बजइया, रास रचइया, सांवरिया, नन्द लाला रे
ज़ालिम थर थर काँप रहे हैं ऐसी शुभ घड़ी आई है
मथुरा गोकुल झूम रहे हैं लाज रखइया आला रे
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola