Table of Contentsआशीष सिंघल ने समझा मध्यम वर्ग का दर्दलगातार बढ़ रहा है मध्यम वर्ग का खर्चमध्यम वर्ग की चिंता कोई नहीं कर रहा हैआशीष सिंघल के पोस्ट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ Indian Middle Class Salary Crisis : मध्यम वर्ग की सैलरी, उसके खर्चे और उन सब के बीच पिसता एक आम मध्यमवर्गीय परिवार. मध्यमवर्ग की परेशानियां अलग तरह की हैं और उनके बीच वह जकड़ता रहता है. आजीवन संघर्ष करता और हासिल कुछ भी नहीं है. मध्यम वर्ग के संघर्षों पर बात करते हुए बेंगलुरु के सीईओ के सोशल मीडिया पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है. पीपलको के को-फाउंडर और सीईओ आशीष सिंघल ने लिंक्डइन पर लिखा है कि मध्यम वर्ग का वेतन एक बड़ा स्कैम है, जिसपर कोई बात नहीं कर रहा है. वे लिखते हैं कि मध्यम वर्ग चुपचाप आर्थिक संकट को झेल रहा है और उफ्फ तक नहीं कर रहा है. आशीष सिंघल ने समझा मध्यम वर्ग का दर्द आशीष सिंघल ने देश के मध्यम वर्ग की स्थिति को समझते हुए पोस्ट में लिखा है कि बढ़ते खर्च और स्थिर वेतन के जाल में मध्यम वर्ग फंसा हुआ है. वह चुपचाप आर्थिक संकट झेल रहा है. उसे ना तो कोई राहत पैकेज मिलता है और ना ही कोई उससे सहानुभूति रखता है. मध्यम वर्ग बहुत बड़े स्कैम का शिकार है, लेकिन उसके साथ हो रहे इस घोटाले पर कोई बात नहीं कर रहा है. मध्यम वर्ग का वेतन एक बहुत बड़ी समस्या है, जिसका निदान कोई नहीं ढूंढ़ रहा है. इस संकटों के बीच मध्यम वर्ग पर एक और बड़ा संकट एआई (AI) के रूप में आया है, जो चुपचाप नौकरियों को खतरे में डाल रहा है. लगातार बढ़ रहा है मध्यम वर्ग का खर्च मध्यम वर्ग को भविष्य में क्या परेशानी देखनी पड़ सकती है, इसपर बात करते हुए आशीष सिंघल लिखते हैं कि पिछले 10 वर्षों में मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति काफी घटी है, लगभग आधी हो गई है. वहीं खर्च में वृद्धि हुई है, जो ऋण के पैसों से बढ़ रही हैं. यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है. 5 लाख से 1 करोड़ तक की आय में जीने वाले मध्यम वर्ग की आय में पिछले 10 में महज 0.4% की वृद्धि हुई है और खाने-पीने की चीजें 80% महंगी हो गई हैं. यह एक सुनियोजित गिरावट नजर आता है. मध्यम वर्ग ईएमआई भर रहा है, फोन भी खरीद रहा है और संघर्ष कर रहा है. वह चुपचाप झटके झेल रहा है. उसके बारे में कोई बात नहीं करता, आखिर मध्यमवर्ग कैसे इस झटकों को झेल रहा है. उसकी समस्या पर मौन समक्ष से परे है. मध्यम वर्ग की चिंता कोई नहीं कर रहा है मध्यम वर्ग के लिए कोई चिंता नहीं करता है. अमीर और अमीर हो रहे हैं और गरीबों के पास इतनी सरकारी योजनाएं हैं कि उन्हें महंगाई और वेतन के मसले ज्यादा प्रभावित नहीं करते. लेकिन व्हाइट काॅलर जाॅब्स वाला मध्यमवर्ग परेशान है. वह महंगाई और ईएमआई के बोझ तले दबा हुआ है और अपनी परेशानियों से घिरा है, लेकिन उसके वेतन पर कोई बात नहीं होती और ना ही उसे इन ईएमआई के बोझ से राहत दिलाने पर विचार होता है. अर्थशास्त्री हरिश्वर दयाल का कहना है कि मध्यम वर्ग अगर ऋण लेता है, तो उसमें कोई खराबी नहीं है, लेकिन क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन लेना असुरक्षित होता है, जिसकी जाल में मध्यम वर्ग फंसा है. आशीष सिंघल के पोस्ट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आशीष सिंघल ने मध्यम वर्ग की स्थिति पर जो चिंता जताई है, उसे लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है. उनकी बात से कई लोग सहमत दिखते हैं तो कुछ लोग ये कह रहे हैं कि मध्यम वर्ग ने अपनी यह स्थिति खुद बनाई है. वह प्रतिरोध नहीं करता है. कुछ लोगों ने आशीष सिंघल से मजाकिया लहजे में पूछा है कि आप भी एक सीईओ हैं आपने अपने कर्मचारियों की सैलरी में कितनी वृद्धि है. Also read: ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने ऐसे मारा था, पानी भी नहीं मांग सका; ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर की पूरी कहानी Jyoti Malhotra : एक हिंदुस्तानी लड़की का पाकिस्तान प्रेम, जानिए पाकिस्तानी जासूस दानिश के संपर्क में कैसे आई 1971 में जब भारत ने पाकिस्तान के 5,795 वर्ग मील भूमि पर कर लिया था कब्जा, तो क्यों कर दिया वापस? विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें