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Golden Passport: वानुआतु ही नहीं ये देश भी देते हैं स्थायी निवास और नागरिकता

Updated at : 11 Mar 2025 2:33 PM (IST)
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Golden Passport: वानुआतु ही नहीं ये देश भी देते हैं स्थायी निवास और नागरिकता

Golden Passport: गोल्डन पासपोर्ट या फिर सिटिजन बाय इन्वेस्मेंट (CBI) स्कीम, एक ऐसी व्यवस्था जो अमीरों के लिए बनायी गई है. इसके तहत बहुत से देश अमीरों को अपने यहां की नागरिकता देने या स्थायी निवास देने के लिए आकर्षित करते हैं. डोनाल्ड ट्रंप गोल्डन कार्ड के माध्यम से ऐसे ही लोगों को अमेरिका की नागरिकता देने की बात कर रहे हैं. कई देश पहले से इसे लागू कर चुके हैं.

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Golden Passport: आईपीएल के फाउंडर चेयरमैन ललित मोदी के वानुआतु की नागरिकता लेने और फिर रद्द होने के बाद से गोल्डन पासपोर्ट इन दिनों सुर्खियों में है. ललित मोदी ने वानुआतु का गोल्डन पासपोर्ट सिटिजन बाय इन्वेस्मेंट (CBI) स्कीम के तहत खरीदा था. इस तरह से नागरिकता या पासपोर्ट खरीदने का मतलब है कि वह व्यक्ति उस देश के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में योगदान कर रहा है. वो वहां निवास कर सकता है और वहां जन्म लेने वालों की तरह ही उसे अधिकार मिलेंगे. लेकिन गोल्डन पासपोर्ट जैसी योजनाओं को लेकर ये जानकारी होना जरूरी है कि नागरिकता और स्थायी निवास दो अलग-अलग व्यवस्था हैं.

नागरिकता और स्थायी निवास में अंतर

किसी देश की नागरिकता और स्थायी निवास के बीच बीच बड़ा अंतर है. किसी व्यक्ति को उस देश नागरिकता मिलने का अर्थ है कि वहां जन्म लेने वाले व्यक्ति के सभी अधिकार उसे मिल जाते हैं. इसमें पासपोर्ट और वोट देने के अधिकार सहित कई अन्य सुविधाएं हैं. जबकि स्थायी निवास कोई व्यक्ति उस देश के भीतर रहने, वहां काम करने और यात्रा करने की अनुमति तक सीमित है. ये निवास उसे आजीवन मिलता है. गोल्डन वीज़ा निवास की अनुमति देता है लेकिन नागरिकता नहीं देता है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के अनुसार, गोल्डन वीज़ा के लिए सबसे लोकप्रिय स्थल वानुआतु की तरह ही पुर्तगाल और ग्रीस भी हैं. पुर्तगाल के पासपोर्ट से 189 देशों और ग्रीस के पासपोर्ट से 186 देशों में बिना जाने की अनुमति है.

यहां करें निवेश और पाएं नागरिकता

धनी लोगों के लिए दूसरे में देश में बसने के लिए एक एक सुविधा है, निवेश के माध्यम से नागरिकता लेना. इसके तहत उस देश में निवेश करके आर्थिक सहयोग करना. इसके के लिए वह देश निवेशकर्ता को अपना पासपोर्ट देता है. एंटीगुआ, बारबुडा, सेंट लूसिया, ग्रेनेडा, डोमिनिका आदि देश निवेश करने वालों को नागरिकता देने के लिए जाने जाते हैं. सिटिजन बाय इन्वेस्मेंट (CBI) स्कीम कंबोडिया, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर भी देता है. कंबोडिया में दो करोड़ रुपये निवेश करके इसकी सुविधा ली जा सकती है. वहीं सिंगापुर में दो साल के लिए लगभग 18 करोड़ रुपये का निवेश करना होता है. ऑस्ट्रेलिया में लगभग 9 करोड़ रुपये निवेश करके ये सुविधा ली जा सकती है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसी तरह की ‘गोल्डन कार्ड’ स्कीम शुरू करने की घोषणा की है. इसमें अमेरिका की नागरिकता लेने के लिए 50 मिलियन डॉलर खर्च करना होगा.

एक साथ दो देशों में रहने की व्यवस्था

कुछ ऐसे देश भी हैं, एक साथ दो देशों में रहने की सुविधा भी देते हैं. इसमें मूल देश के अलावा दूसरे देश में निवास और काम करने की अनुमति शामिल है. जर्मनी, एस्टोनिया, नार्वे ऐसे ही देश हैं. ग्रेनेडा, एंटीगुआ,सेंट किट्स और नेविस भी दूसरी नागरिका देने वाले देश हैं. अमीर भारतीयों के लिए ऐसे देशों में जाने का विकल्प भी खुला हुआ है.

गोल्डन वीजा और गोल्डन पासपोर्ट में अंतर

गोल्डन वीजा में निवेश के माध्यम से निवास की सुविधा मिलती है. इसमें उसे देश में निवेश के माध्यम से अस्थायी निवास की सुविधा मिलती है. इससे तत्काल नागरिका नहीं मिलती है. उसे देश के जरूरी मानकों को पूरा करने के बाद ही नागरिकता दी जाती है. वहीं गोल्डन पासपोर्ट निवेश से नागरिकता दिलाने की व्यवस्था है. इसमें गोल्डन वीजा से अधिक निवेश करना होता है. अलग-अलग देशों में इसके लिए निवेश की सीमा तय कयी गई है.

डोनाल्ड ट्रंप के गोल्डन कार्ड में क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप के गोल्डन कार्ड के लिए इच्छुक लोगों को 5 मिलियन डॉलर (50 लाख डॉलर) का निवेश करना होगा. इस निवेश से अमेरिका की नागरिकता आसान तरीके से पाने का रास्ता अमेरिका के राष्ट्रपति ने खोला है. इससे पहले अमेरिका में 10 लाख डॉलर का निवेश और 10 नौकरी देकर अमेरिका की नागरिकता ली जा सकती थी.

पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी: ललित मोदी को क्यों भाया वानुआतु, गोल्डन पासपोर्ट से खरीदी थी नागरिकता

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Amit Yadav

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By Amit Yadav

UP Head (Asst. Editor)

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