बिहार में सूखा से मचा हाहाकार, अब माड़-भात पर भी मंडरा रहा संकट, धान की रोपनी को लेकर किसान चिंतित
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Jul 2022 5:01 PM
Bihar Weather Report: सावन माह में कड़ाके की धूप होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. खासकर दियारावर्ती किसान इन दिनों तेज धूप होने के कारण सूखे की मार झेलने को मजबूर है. बरसात के दिनों में तेज धूप होने के कारण धान व गन्ने की फसल सूखने लगी हैं.
बिहार इस समय सूखा की मार झेल रहा है. बारिश नहीं होने के कारण किसान चिंतित है. बिहार में धान की रोपनी न के बराबर हुई है. रोहतास जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर में धान की फसल होती है. इसकी बंपर पैदावार के दम पर रोहतास जिला धान का कटोरा कहलाता है. लेकिन, लगातार मॉनसून के दगा देने और अब तक रोपनी को रफ्तार नहीं पकड़ने के कारण इस बार अब माड़-भात पर भी संकट मंडराने लगा है. यह कहना है कृषि वैज्ञानिक डॉ आरके जलज का. उन्होंने कहा कि रोहतास में पानी का कोई अन्य विकल्प नहीं है, जिसके सहारे धान की फसल को बचाया जा सके.
यह मॉनसून का धोखा है, जिससे किसानों को उबरने में काफी मशक्कत करनी होगी. इस क्षेत्र में 15 जुलाई तक रोपनी पूर्ण कर ली जाती थी, लेकिन इस बार अभी 15 से 20 प्रतिशत ही रोपनी की सूचना है. वह भी बिजली और डीजल पंप के साथ नहर से मिलने वाले पानी की बदौलत. कहीं-कहीं रोपनी नजर आ रही है, लेकिन रोपे धान को बचाने की जद्दोजहद किसानों के लिए मुश्किल पैदा कर रही है. ऐसा लगता है कि खेती पर ही निर्भर किसानों के समक्ष इस वर्ष कहीं माड़-भात के लाले न पड़ जाये.
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जून 2021 में 379.42 मिलीमीटर वर्षा 16 दिनों की बारिश में हुई थी, जबकि जून 2022 में सात दिनों की छिटपुट वर्षा में महज 98.4 मिलीमीटर बारिश हुई. वहीं, जुलाई 2021 में 17 दिनों की बारिश में 191.5 मिलीमीटर वर्षा हुई थी. लेकिन, जुलाई 2022 में अब तक केवल 13.4 मिलीमीटर वर्षा दो दिनों में हुई बारिश में दर्ज की गयी.
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इकोनॉमी सर्वे ऑफ बिहार वर्ष 2019-19 के अनुसार, बक्सर जिले में धान की खेती का रकबा 80 हजार हेक्टेयर है. इससे दो लाख 65 हजार टन धान का उत्पादन होता है. कैमूर जिले में धान की खेती का रकबा 73 हजार हेक्टेयर है, जिससे दो लाख 18 हजार टन धान की पैदावार होती है. वहीं, रोहतास जिले में एक लाख 40 हजार हेक्टेयर में धान की खेती से पांच लाख 17 हजार टन धान की उपज होती है. यानी रोहतास जिला इन दोनों जिला से भी अधिक खेतों में धान की फसल लगाता है और उत्पादन करता है.
सावन माह में कड़ाके की धूप होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. खासकर दियारावर्ती किसान इन दिनों तेज धूप होने के कारण सूखे की मार झेलने को मजबूर है. बरसात के दिनों में तेज धूप होने के कारण धान व गन्ने की फसल सूखने लगी हैं. दियारा में बारिश व बाढ़ के पानी से ही फसल तैयार होता है. इन किसानों ने बताया कि बरसात का समय होने के कारण और दियारा में पंपसेट की व्यवस्था नहीं है. जिनके पास पंपसेट था वह लोग भी दियारा से बाहर कर दिए हैं. ऐसे में पानी के अभाव में फसल सूखने लगे हैं. किसानों ने बिहार सरकार से बगहा अनुमंडल के सभी प्रखंडों को सूखा घोषित करने की मांग की है.
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