Caste Based Survey: बिहार में पहली बार 215 जातियां की सामने आयी हिस्सेदारी, इनकी आबादी एक फीसदी से भी कम

Updated at : 03 Oct 2023 5:30 AM (IST)
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Caste Based Survey: बिहार में पहली बार 215 जातियां की सामने आयी हिस्सेदारी, इनकी आबादी एक फीसदी से भी कम

पिछड़ा वर्ग में यादव, कुर्मी, कुशवाहा (कोइरी), बनिया, तेली, जबकि अत्यंत पिछड़ा वर्ग में धानुक, कानू, नोनिया, बिंद, चंद्रवंशी, नाई, कुम्हार, मल्लाह आदि जातियों की आबादी सबसे अधिक है.

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सुमित कुमार, पटना

जाति गणना के साथ ही बिहार में पहली बार 215 जातियां व आबादी में उनकी वास्तविक हिस्सेदारी निकल कर सामने आयी है. जाति गणना के आंकड़ों में राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक रूप से प्रभुत्व रखने वाली जातियों के साथ ही इन मानकों पर पिछड़ी रही जातियों की संख्या का भी पता लगा है. 215 जातियों में 190 जातियों की आबादी एक फीसदी से भी कम है. अनुपात में देखें तो सबसे अधिक 14.26 फीसदी आबादी यादव जाति की है. उसके बाद दुसाध 5.311 फीसदी, चमार 5.25 फीसदी, कुशवाहा 4.21 आदि जातियां हैं. पिछड़ा वर्ग में यादव, कुर्मी, कुशवाहा (कोइरी), बनिया, तेली, जबकि अत्यंत पिछड़ा वर्ग में धानुक, कानू, नोनिया, बिंद, चंद्रवंशी, नाई, कुम्हार, मल्लाह आदि जातियों की आबादी सबसे अधिक है. अनुसूचित जाति में दुसाध, चमार, मुसहर जाति का वर्चस्व बरकरार है. धोबी, पासी एक फीसदी से भी कम हैं. अनारक्षित श्रेणी में ब्राह्मण सबसे अधिक, उनके बाद राजपूत और भूमिहार आबादी है. कायस्थ जाति की संख्या एक फीसदी से भी कम है.

17.70 फीसदी मुसलमानों में 11 से 12 फीसदी पिछड़ा वर्ग से

गणना के मुताबिक मुसलमानों की 17.70 फीसदी आबादी में 11 से 12 फीसदी आबादी पिछड़ा वर्ग की है. पिछड़े मुसलमानों में सर्वाधिक 3.54 फीसदी आबादी मोमिन, जुलाहा, अंसारी की है. इनके साथ ही धुनिया मुस्लिम की आबादी 1.429 फीसदी, राइन या कुंजरा मुस्लिम की आबादी 1.398 फीसदी, सूरजापुरी मुस्लिम की आबादी 1.871 और शेखड़ा की आबादी 0.19 फीसदी है. अनारक्षित मुसलमानों में शेख 3.821 फीसदी और पठान (खान) की 0.754 फीसदी आबादी है.

1931 के बाद पहली बार जातिगत आंकड़े हुए जारी

1931 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना हुई थी, जिसके आंकड़े प्रकाशित किये गये. इसके बाद लंबे समय तक मांग होने के बावजूद देश में जाति जनगणना नहीं हुई. हालांकि, इस बीच यूपीए कार्यकाल में पूरे देश में जाति जनगणना हुई, लेकिन इसके आंकड़े प्रकाशित नहीं हुए. कई राज्यों ने भी जाति गणना करायी, मगर उसके आंकड़े प्रकाशित नहीं हो सके. बिहार सरकार ने पहली बार अपने बलबूते जाति आधारित गणना कराते हुए उनसे आंकड़े भी प्रकाशित किये हैं.

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उमेश कुशवाहा ने कहा बिहार ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की

जाति त गणना के आंकड़े सार्वजनिक होने पर जदयू ने खुशी जताई है. प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने सोमवार को कहा है कि बिहार ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. भाजपा ने इस गणना को रोकने के लिए अपना समूचा दमखम लगा दिया था , लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मजबूत इच्छशक्ति के आगे सब कुछ धराशाही हो गया. जातियों के वास्तविक आंकड़े सामने आने के बाद विकास की धारा से भटक चुका समाज अब पुनः सशक्त बनने की ओर अग्रसर हो सकेगा. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हमारी मांग है कि सामाजिक न्याय को स्थापित करने का यह लक्ष्य केवल बिहार तक सीमित न रहे, केंद्र सरकार से भी आग्रह है कि पूरे देश में जाति गणना करवायी जाये. राज्य सरकार को बधाई देने वालों में विधान पार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधान पार्षद रवींद्र प्रसाद सिंह, मुख्यालय प्रभारी चंदन कुमार सिंह आदि शामिल रहे.

एनसीपी ने कहा- बिहार सरकार ने नजीर पेश किया

बिहार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राणा रणवीर सिंह ने बिहार में हुई जाति जनगणना की सराहना करते हुए कहा है कि बिहार सरकार ने जाति जनगणना कराकर पूरे देश के लिए एक नजीर पेश की है. राणा ने आगे कहा कि जिस प्रकार बिहार में जाति जनगणना हुई है उसी प्रकार देशभर में जाति जनगणना करायी जाये.

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RajeshKumar Ojha

लेखक के बारे में

By RajeshKumar Ojha

Senior Journalist with more than 20 years of experience in reporting for Print & Digital.

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