साक्षरता दर में वृद्धि

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 11 Sep 2025 5:41 AM

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साक्षरता दर में वृद्धि

Literacy Rate : साक्षरता दिवस को संबोधित करते हुए शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने ठीक ही रेखांकित किया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों ने पूर्ण साक्षरता हासिल कर एक मिसाल कायम की है.

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Literacy Rate : देश में साक्षरता दर का बढ़कर 80.9 प्रतिशत होना बड़ी उपलब्धि है, तो त्रिपुरा, मिजोरम और गोवा के बाद हिमाचल प्रदेश का चौथा पूर्ण साक्षर राज्य बनना उतनी ही उल्लेखनीय सफलता है. पिछले दिनों राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी कि देश की साक्षरता दर 2011 के 74 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 80.9 फीसदी हो गयी. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण साक्षरता हासिल कर ली है और त्रिपुरा, मिजोरम और गोवा के बाद यह देश का चौथा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है.

जबकि जून, 2024 में लद्दाख पहला पूर्ण साक्षर केंद्रशासित प्रदेश घोषित हुआ था. केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरिमा, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का माध्यम है. उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति तो तभी होगी, जब साक्षरता हर नागरिक की जिंदगी का हिस्सा बन जायेगी. साक्षरता की नयी परिभाषा में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता तथा नागरिक अधिकारों की समझ को शामिल किया जा रहा है.

साक्षरता दिवस को संबोधित करते हुए शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने ठीक ही रेखांकित किया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों ने पूर्ण साक्षरता हासिल कर एक मिसाल कायम की है. उन्होंने तीन प्राथमिकताएं रेखांकित कीं-स्वयंसेवा की भावना बनाये रखना, साक्षरता को कौशल और आजीविका से जोड़ना तथा साक्षरता की परिभाषा का निरंतर विस्तार करना. उन्होंने कहा कि भारत ने मजबूत सार्वजनिक डिजिटल ढांचा तैयार कर दुनिया, खासकर ग्लोबल साउथ में एक अनुपम उदाहरण पेश किया है. जिन उपलब्धियों को हासिल करने में पचास साल लग सकते थे, डिजिटल नवाचारों के माध्यम से भारत ने उन्हें लगभग एक दशक में ही हासिल कर लिया है. विगत एक से आठ सितंबर तक उल्लास साक्षरता अभियान, 2025 मनाया गया. इस कार्यक्रम से तीन करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 42 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं और यह कार्यक्रम अब 26 भारतीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री प्रदान करता है, जिससे साक्षरता समावेशी बन रही है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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