वृद्धि में बाधा
Author : संपादकीय Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Apr 2021 10:30 AM
growth rate
अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गयी है. आर्थिक वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि हम कितनी जल्दी इस महामारी पर काबू पाते हैं.
कोरोना महामारी की दूसरी लहर भयावह विभीषिका में बदल रही है. इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी पाबंदियां लगायी जा रही हैं. हालांकि पिछले साल की तरह व्यापक लॉकडाउन नहीं लगाया गया है, लेकिन रात व सप्ताहांत के कर्फ्यू, सीमित आवाजाही और कई तरह के कारोबारों पर अस्थायी रोक से आर्थिक गतिविधियों में संकुचन आ रहा है. अनेक जगहों पर कुछ दिनों के लिए लॉकडाउन भी लगाया जा रहा है.
कोरोना वायरस के तेज संक्रमण को देखते हुए यह कह पाना मुश्किल है कि स्थिति कब तक सामान्य होगी. पिछले साल के आखिरी महीनों में पाबंदियों के हटाने के साथ ही कारोबार और कामकाज बहुत हद तक पहले की तरह होने लगे थे. उस वजह से बीते वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में ऋणात्मक हो चुके वृद्धि दर को बढ़ाया जा सका था. उस बढ़त के आधार पर यह अनुमान लगाया गया था कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर दो अंकों में रहेगी और अगले वित्त वर्ष में यह दर 2019-20 के स्तर पर आ जायेगी.
लेकिन महामारी की दूसरी लहर से उस उम्मीद पर पानी फिर सकता है. अब विश्व बैंक का आकलन है कि 2021-22 के वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.5 से लेकर 12.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है. इससे स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गयी है. इस दायरे में आंकड़ा क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कितनी जल्दी महामारी पर काबू करेंगे क्योंकि सभी अनुमानों का आधार यह भरोसा था कि देश को दूसरी लहर का सामना नहीं करना पड़ेगा.
मांग और उत्पादन घटने के कारण बेरोजगारी दर भी बढ़ने लगी है. ऐसे में एक बड़ी उम्मीद मॉनसून से है, जिसके इस साल सामान्य रहने की आशा है और सूखे की कोई आशंका दूर-दूर तक नहीं है. अच्छी बारिश से फसलों की बुवाई अधिक होगी, जिससे ग्रामीण आमदनी में बढ़ोतरी होगी. समुचित उपज से खाद्य मुद्रास्फीति को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी. उल्लेखनीय है कि पिछले साल लॉकडाउन में और बाद में बड़ी मात्रा में कृषि उत्पादों के निर्यात से अर्थव्यवस्था को बहुत सहारा मिला था.
अनाज के भरे भंडारों की वजह से करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त या सस्ता राशन मुहैया कराया जा सका था. पिछले साल अनेक चरणों में केंद्र सरकार द्वारा घोषित वित्तीय राहत, छूट, कल्याण कार्यक्रमों आदि से भी आर्थिकी को मदद मिली थी. यह भी ध्यान रखना होगा कि कृषि क्षेत्र से अपेक्षाओं पर खाद्य पदार्थों के वैश्विक मूल्यों का भी असर होगा तथा सरकारी व्यय की भी इसमें बड़ी भूमिका होगी. यही कारण है कि कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों को सरकारी मदद उपलब्ध कराने की मांग उठने लगी है. मौजूदा स्थिति में कुछ बजट प्रावधानों को फौरी तौर पर लागू करने की जरूरत पड़ सकती है. फिलहाल हमारा पूरा जोर बचाव के उपायों और टीकाकरण बढ़ाने पर होना चाहिए.
Posted By : Sameer Oraon
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










