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सतर्कता ही बचाव

By संपादकीय
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सतर्कता ही बचाव
सतर्कता ही बचाव
Prabhat Khabar

कोरोना महामारी की दूसरी लहर से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से संक्रमण से बचने के उपायों का गंभीरता से पालन करने का आह्वान किया है. उल्लेखनीय है कि बीते कुछ दिनों से रोजाना संक्रमणों के मामलों की तादाद एक लाख से ज्यादा है. इस दूसरी लहर के कारणों में निर्देशों का ठीक से पालन न करने की लापरवाही भी शामिल है.

मास्क पहनना, शारीरिक दूरी रखना तथा हाथ साफ करना कोरोना संक्रमण से बचाव के बुनियादी उपाय हैं. लेकिन कुछ माह पहले संक्रमितों की संख्या घटते जाने और जनवरी के मध्य से चालू टीकाकरण अभियान से लोगों में यह निराधार भावना घर गयी कि अब इस वैश्विक महामारी पर काबू कर लिया गया है, जबकि तमाम चिकित्सक, विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी लोगों को लगातार आगाह कर रहे थे कि जब तक टीकाकरण अभियान पूरा नहीं हो जाता, किसी भी तरह की चूक खतरनाक हो सकती है.

पाबंदियों में ढील, त्योहार, राजनीतिक व सामाजिक कार्यक्रम आदि ने लोगों को लापरवाह होने का पूरा मौका दिया. इसका नतीजा हमारे सामने है. एक तरफ हमें वायरस के संक्रमण से जूझना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ फिर से पाबंदियां लगने लगी हैं. हमने साल भर तक जरूरी निर्देशों का पालन किया है और हमें इसे आगे भी जारी रखना है.

जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह दी है, हमें अपनी रोग निरोधक क्षमता को मजबूत रखना है ताकि कोरोना वायरस का असर कम-से-कम हो. हमारा टीकाकरण अभियान भी संतोषजनक गति से चल रहा है और खुराक देने के रोजाना आंकड़ों के हिसाब से भारत अब अमेरिका के बाद दूसरे पायदान पर है.

अभी 45 साल से अधिक आयु के लोगों को टीका दिया जा रहा है. टीकाकरण की गति तेज करने के साथ यह भी मांग की जा रही है कि सभी वयस्कों को टीका दिया जाए. हमें यह समझना चाहिए कि टीके बनाने और वितरित करने की क्षमता सीमित होने के कारण चरणबद्ध टीकाकरण हो रहा है. यदि सभी वयस्कों को भी टीका दिया जाने लगे, तब भी सबके टीकाकरण छह-सात महीने लग सकते हैं.

ऐसे में संयम बरतने की जरूरत है. दूसरी लहर के दौरान कई जगहों पर सरकार की ओर से लोगों को निर्देशों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. यह सराहनीय पहल है, किंतु कुछ जगहों पर पाबंदियों के उल्लंघन पर प्रशासन और पुलिस के द्वारा अधिक बल प्रयोग या लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने के मामले भी सामने आये हैं. यह अनुचित है.

प्रशासनिक कर्मियों, चिकित्साकर्मियों और नागरिकों को मिलजुल कर इस संकट का सामना करना है. यदि हम ठीक से निर्देशों का पालन कर अपना और अपनों का बचाव करते हैं तथा बारी-बारी से वैक्सीन की दोनों खुराक लेते हैं, तो न केवल इस दूसरी लहर में संक्रमण की संख्या कम हो सकती है, बल्कि किसी तीसरी लहर की आशंका से भी छुटकारा मिल जायेगा. उपायों पर अमल में लापरवाही तथा पाबंदियों का उल्लंघन करना कोई साहसिक काम नहीं है. हमें सतर्क रहना चाहिए़

Posted By : Sameer Oraon

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