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डेटा सुरक्षा हेतु विधेयक

Updated at : 05 Aug 2022 8:28 AM (IST)
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डेटा सुरक्षा हेतु विधेयक

निजता और गोपनीयता के सवाल को अनुत्तरित नहीं छोड़ा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने डेटा गोपनीयता को अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया है.

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ऑनलाइन माध्यमों पर सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ रही हैं. डेटा संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों के प्रभावी समाधान हेतु सरकार अब व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक के स्थान पर डिजिटल पारिस्थितिकी हेतु एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने जा रही है. इसमें नये टेलीकॉम नियमों, सूचना प्रौद्योगिकी नियमों और उपभोक्ता निजता कानूनों को शामिल किया जायेगा.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, नया व्यापक कानूनी मसौदा आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप होगा. अधिकांश डेटा खपत मोबाइल फोन के जरिये हो रहा है. नये कानून में बड़ी तकनीकी कंपनियों से मीडिया सुरक्षा और आईटी मध्यस्थ नियमों में सुधार भी प्रस्तावित है. सरकार जल्द ही हितधारकों के साथ परामर्श शुरू करेगी.

संसद में 2019 में व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पेश किया गया था. बाद में इसे जांच हेतु संयुक्त समिति को भेजा गया. तीन वर्षों तक चले परामर्श के दौरान विधेयक में 81 संशोधन और अनेक सुझाव प्राप्त हुए. ऐसे में सरकार ने पुराने मसौदे की जगह अब नये सिरे से तैयारी शुरू कर दी है. इसमें सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का भी संज्ञान लिया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में दुनियाभर में डेटा सेंधमारी के 7000 से अधिक गंभीर मामले सामने आये. आशंका है कि 2024 तक वैश्विक स्तर पर डेटा सेंधमारी से पांच ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है. इसी कारण डेटा संग्रहण, प्रबंधन और डेटा साझा करने से जुड़ी चिंताओं को लेकर सरकारें सतर्क हो रही हैं. वर्ष 2017 के बाद से देश में डेटा सेंधमारी बढ़ी है.

ऐसे में निजता और गोपनीयता के सवाल को अनुत्तरित नहीं छोड़ा जा सकता. केएस पुट्टास्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डेटा गोपनीयता को अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया है. डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास में भागीदार लगभग सभी कंपनियों का मुख्यालय विदेशों में है. वे अन्यत्र अधिकार क्षेत्र में डेटा का निर्यात भी करती हैं.

यह देश के लिए न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि सुरक्षा के नजरिये से भी चिंताजनक है. डेटा के इस्तेमाल और नियंत्रण में शामिल ऐसी सभी कंपनियों की जवाबदेही अनिवार्य करने की जरूरत है. ऊर्जा, रियल एस्टेट और इंटरनेट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा, तभी डेटा संरक्षण पुख्ता होगा, साथ ही देश डेटा सेंटर का एक वैश्विक हब बन सकेगा.

वर्तमान में डेटा से जुड़े नियमों में निरंतर सुधार की जरूरत है. चूंकि, डेटा संरक्षण डिजिटल अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास के लिए आवश्यक है, अत: भारत को यूरोपीय संघ के जीडीपीआर (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रिजीम) जैसे कड़े कानून लागू करने होंगे, तभी साइबर दुनिया की अज्ञात और अनगिनत चुनौतियां का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा.

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