प्रदूषण से जंग

दिल्ली में जानलेवा हो चुके वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सड़कों पर कारों को सीमित रखने के लिए की गयी पहल पहले दिन तो सफल रही है, पर अंतिम आकलन 15 जनवरी के बाद ही किया जा सकेगा. इस अवधि में सम और विषम पंजीकरण संख्यावाली कारें एक दिन के अंतराल पर […]
दिल्ली में जानलेवा हो चुके वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सड़कों पर कारों को सीमित रखने के लिए की गयी पहल पहले दिन तो सफल रही है, पर अंतिम आकलन 15 जनवरी के बाद ही किया जा सकेगा. इस अवधि में सम और विषम पंजीकरण संख्यावाली कारें एक दिन के अंतराल पर चलायी जानी हैं. सर्वे बताते हैं कि दिल्ली दुनिया का सर्वाधिक प्रदूषित शहर है.
ब्रिटेन के सर्रे विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण में कहा गया है कि वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए 10 सबसे खतरनाक तत्वों में से एक है. दिल्ली में भी इससे हर साल हजारों जानें चली जाती हैं. शहर की मौजूदा आबादी ढाई करोड़ से अधिक है और लगातार वद्धि हो रही है. एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक शहर में वाहनों की संख्या ढाई करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो 2010 में महज 47 लाख थी.
हालांकि दिल्ली में प्रदूषण के लिए सिर्फ वाहन ही जिम्मेवार नहीं हैं. सर्वेक्षण ने शहर के भूगोल, बढ़ोतरी, खराब ऊर्जा स्रोत और प्रतिकूल मौसम जैसे कारकों को भी चिह्नित करते हुए व्यापक समाधान का आह्वान किया है. निश्चित रूप से सिर्फ वाहनों से होनेवाले प्रदूषण को ही ध्यान में रख कर स्थायी हल नहीं पाया जा सकता है. वर्ष 2001 से 2011 के बीच दिल्ली की कुल ऊर्जा खपत में 57 फीसदी की वृद्धि हुई है. शहर के भूगोल के कारण प्रदूषित हवा का विस्थापन संभव नहीं हो पाता है, जैसी सुविधा मुंबई को है.
दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में भी अत्यधिक प्रदूषण व्याप्त है. पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को ‘गैस चैंबर’ बन चुके शहर के सुधार के लिए ठोस उपाय करने का निर्देश दिया था. बहरहाल, दिल्ली सरकार ने वाहनों से होनेवाले प्रदूषण को कम करने के इरादे से यह तात्कालिक और अस्थायी उपाय अपनाया है.
उसने अन्य तरीकों से इस समस्या के समाधान की भी घोषणा की है. समस्या को आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों में देखने की जरूरत है. एक तरफ विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाना होगा, और दूसरी ओर सरकार के साथ समाज को भी अपने उत्तरदायित्व को समझना होगा. सरकार ने कहा है कि वह सार्वजनिक यातायात की स्थिति बेहतर करने की कोशिश में है.
नागरिकों को भी सरकार की ऐसी पहलों का समर्थन करना चाहिए. आखिर, प्रदूषण का भयावह परिणाम हमारे वर्तमान और भविष्य को ही भुगतना है. इसलिए, हमें सरकार पर बेहतर नीतियों के लिए दबाव बनाना चाहिए और सरकार की अच्छी पहलों का समर्थन करना चाहिए. दिल्ली का अनुभव देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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