सूखे से त्रस्त किसानों के लिए बने नीति

Updated at : 24 Oct 2015 12:11 AM (IST)
विज्ञापन
सूखे से त्रस्त किसानों के लिए बने नीति

भारत एक कृिष प्रधान देश है. यहां की 60 फीसदी आबादी अब भी खेती पर ही आश्रित है. वहीं, खेती भी पूरी तरह से मॉनसून पर निर्भर है. इस साल मॉनसून विदाई के कगार पर है, मगर देश में बारिश सामान्य से भी कम है. इससे इस साल भी देश के ज्यादातर भागों में सूखा […]

विज्ञापन
भारत एक कृिष प्रधान देश है. यहां की 60 फीसदी आबादी अब भी खेती पर ही आश्रित है. वहीं, खेती भी पूरी तरह से मॉनसून पर निर्भर है. इस साल मॉनसून विदाई के कगार पर है, मगर देश में बारिश सामान्य से भी कम है.
इससे इस साल भी देश के ज्यादातर भागों में सूखा के आसार दिखायी दे रहे हैं. यह बीते सौ वर्षों में चौथी बार ऐसा होने जा रहा है, जब देश में लगातार दो वर्षों तक सूखा पड़ा हो. मौसम की इस बार से बचाव के लिए कुशल प्रबंधन और स्थायी नीितयों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखायी दे रहा है.
ऐसे में यह कहना गलत न होगा कि देश का िकसान न केवल बेकारी का शिकार होगा, बल्कि उसका पूरा परिवार भुखमरी की भी चपेट में आ जायेगा. एक तो वैसे ही कृषि ऋण व अन्य महाजनी कर्जों के बोझ तले दब कर किसान परेशान हैं. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वे किसानों के परिवार के भरण-पोषण के लिए एक नयी नीति बनाये.
– लोकेश सिंह, ई-मेल से
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola