पैकेज के बाद टास्क

Published at :20 Aug 2015 4:05 AM (IST)
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पैकेज के बाद टास्क

बिहार के लिए पहली बार इतने बड़े आर्थिक पैकेज का एलान केंद्र सरकार ने किया है. बिहार के बंटवारे के बाद यहां के सभी राजनीतिक दलों ने मिल कर केंद्र सरकार से 1.69 लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा था. लेकिन, तब केंद्र से कोई खास सहायता नहीं मिली थी, अलबत्ता दसवीं योजना के […]

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बिहार के लिए पहली बार इतने बड़े आर्थिक पैकेज का एलान केंद्र सरकार ने किया है. बिहार के बंटवारे के बाद यहां के सभी राजनीतिक दलों ने मिल कर केंद्र सरकार से 1.69 लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा था.
लेकिन, तब केंद्र से कोई खास सहायता नहीं मिली थी, अलबत्ता दसवीं योजना के तहत हर साल एक हजार करोड़ रुपये की राशि मुहैया करायी गयी थी. बहरहाल, अब केंद्र ने जिस सवा लाख करोड़ रुपये के पैकेज और 40 हजार करोड़ रुपये की चालू योजनाओं के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, उसे व्यवहार में उतारने की चुनौती होगी.
विधानसभा चुनाव के बाद सरकार चाहे जिस किसी की बने, उसके सामने 1.65 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को विभिन्न कार्यक्रमों के जरिये मूर्त रूप देने का बड़ा टास्क होगा. बिहार के हितों के लिए जरूरी है कि इस पैकेज से चालू होनेवाली योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की रूपरेखा तैयार की जाये. आमतौर पर देखा जाता है कि सरकारी योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं और उसकी लागत बढ़ती जाती है.
समय और लागत की मार ङोलनेवाली ऐसी कई बड़ी व महत्वपूर्ण योजनाएं अब भी लटकी पड़ी हैं. इसी से जुड़ा है योजनाओं के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग का सवाल. व्यवहार में देखा जाता है कि योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेवारी जिस एजेंसी पर होती है, उसके काम की सही मॉनीटरिंग नहीं हो पाती है. इसके चलते योजनाएं आधी-अधूरी तो रहती ही है, उस पर व्यय किया हुआ पैसा पूरी तरह बरबाद हो जाता है. यानी उस पैसे का कोई रिटर्न आम आदमी को उसकी सुविधा के रूप में नहीं मिल पाता है.
इससे जुड़ी तीसरी महत्वपूर्ण बात है भ्रष्टाचार को लेकर. योजनाओं की लेट-लतीफी या समय पर उसके पूरा नहीं होने की वजहों में भ्रष्टाचार भी एक बड़ा कारण बन जाता है. लिहाजा, सरकार को इस पर सतत और सख्त निगरानी रखनी होगी. चौथी जरूरत ऐसे उपायों की होगी, जिससे कोई मामला अदालतों में बेवजह नहीं जाये. इससे भी योजनाएं लटकती रही हैं.
पटना में पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन इसका ताजा उदाहरण है. स्टेशन के उद्घाटन की तारीख मुकर्रर कर दी गयी, पर लोगों के विरोध की वजह से उद्घाटन नहीं हो सका. स्थानीय लोग कोर्ट में चले गये. कोर्ट ने उन्हें पुनर्वासित करने को कहा है. निश्चय ही इस बड़े पैकेज से बिहार में विकास के एक नये अध्याय की शुरुआत हो सकती है, बशर्ते अत्यंत बारीकी से अवरोधों को समय रहते दूर कर लिया जाये.
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