आतंक को चुनौती
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Aug 2015 6:58 AM (IST)
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अरब देशों-बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ)- के साथ भारत के संबंधों का आधार भारत की ऊर्जा संबंधी जरूरत और पारस्परिक व्यापार रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के बाद खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध में एक तीसरा पक्ष पारस्परिक सुरक्षा का जुड़ा […]
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अरब देशों-बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ)- के साथ भारत के संबंधों का आधार भारत की ऊर्जा संबंधी जरूरत और पारस्परिक व्यापार रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा के बाद खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध में एक तीसरा पक्ष पारस्परिक सुरक्षा का जुड़ा है. यह प्रधानमंत्री के दौरे की बड़ी कामयाबी है. इस यात्रा में यूएइ से भारत में आगामी पांच साल में 75 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश का वादा भी हासिल किया गया है. बुनियादी ढांचे के निर्माण के मामले में सिद्धहस्त होने के कारण यूएइ के लिए भारत में निवेश का यह आकर्षक क्षेत्र है. इसके साथ, इस यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि आतंकवाद पर नियंत्रण के मोर्चे पर यूएइ और भारत का एक साथ आना है.
संयुक्त वक्तव्य में स्पष्ट कहा गया है कि ‘दोनों देश चरमपंथ और धर्म के बीच किसी भी तरह के संबंध की संभावना को पूरी तरह से खारिज करते हैं, चाहे वो किसी देश द्वारा धर्म का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए ही क्यों न किया जा रहा हो’. इस बयान में आतंकवाद के ढांचे को खत्म करने और इसके दोषियों को सजा देने की जरूरत पर बल दिया गया है. आतंकवाद के हवाले से आया सुरक्षा का यह पक्ष दो कारणों से बहुत महत्वपूर्ण है. एक तो खाड़ी के देशों में आतंकवाद विषयक भारत की चिंता में साझा करनेवाला एक नया सहयोगी मिला है. और दूसरे, एशिया में आतंकवाद के प्रश्न को वैश्विक मंचों पर नये सिरे से सोचने और परिभाषित करने की बात कह कर भारत ने पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद के मुद्दे को उठाने में सफलता पायी है.
प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य कि संयुक्त राष्ट्र अब तक तय नहीं कर पाया है कि किस देश को आतंकवाद का शिकार माना जाये और किसे आतंकवाद समर्थक, सीधे-सीधे पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद के संबंध में भारत की चिंता से जुड़ता है. उन्होंने किसी देश का नाम भले न लिया हो, पर इसमें पाकिस्तान को साफ संदेश है कि वह आतंकवाद पर अपनी रणनीति और राजनीति को बदले. यूएइ तेल के कारोबार से अजिर्त धन का उपयोग वित्त, तकनीक और पर्यटन के विकास में करने का इच्छुक है, लेकिन आधुनिक राष्ट्र-राज्यों की पांत में शामिल होने की उसकी आकांक्षा की राह में आतंक और कट्टरता बड़ी बाधा हैं.
अल-कायदा और इसलामिक स्टेट से प्रेरित हिंसा और अतिवाद भारत और यूएइ दोनों के लिए बड़ी चुनौती हैं. ऐसे में शांति और विकास की यह साङोदारी भविष्य की बड़ी उम्मीद बन कर आयी है. आमीन.
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