आज एकलव्य जैसे शिष्यों की जरूरत

Published at :05 Sep 2013 2:27 AM (IST)
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आज एकलव्य जैसे शिष्यों की जरूरत

आज शिक्षक दिवस है. लेकिन, क्या आज के विद्यार्थी गुरु ओं का आदर करना जानते हैं? क्या आज की पीढ़ी गुरु ओं का सम्मान करना जानती है? जवाब मिलेगा नहीं. हम आज की पूरी पीढ़ी को दोषी नहीं ठहरा रहे. पर आज कहीं से शिक्षकों के सम्मान की बात सुनने में नहीं आती. सुनने को […]

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आज शिक्षक दिवस है. लेकिन, क्या आज के विद्यार्थी गुरु ओं का आदर करना जानते हैं? क्या आज की पीढ़ी गुरु ओं का सम्मान करना जानती है? जवाब मिलेगा नहीं. हम आज की पूरी पीढ़ी को दोषी नहीं ठहरा रहे.

पर आज कहीं से शिक्षकों के सम्मान की बात सुनने में नहीं आती. सुनने को मिलता है बस यह कि कोई शिक्षक के साथ गाली-गलौज कर रहा है, तो कोई मार-पीट. कोई अपनी ही शिक्षिका का आपत्तिजनक एमएमएस बना रहा है, तो कोई छेड़खानी कर रहा है.सुनने को मिलता है न! माता-पिता के बाद अगर कोई महत्वपूर्ण है, तो वह शिक्षक ही है.

ऐसी शर्मनाक हरकतें करनेवालों को एकलव्य जैसे शिष्य से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिसने अपने गुरु के मांगने पर अपना अंगूठा तक अर्पित कर दिया था. आज भारत को ऐसे ही आज्ञाकारी शिष्यों की जरूरत है, तभी शिक्षक दिवस सार्थक होगा.

पालुराम हेंब्रम, सलगाझारी

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