इसे बिगड़ैल छोकरों का खेल न बनायें

Published at :01 Sep 2013 3:26 AM (IST)
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इसे बिगड़ैल छोकरों का खेल न बनायें

कैरी पैकर के जमाने से ही क्रिकेट खिलाड़ियों को पैसे का चस्का लग गया. उसके बाद से खेल में नैतिक-अनैतिक कुछ नहीं रहा. 1976-77 के भारत दौरे में टोनी ग्रेग की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाड़ी जान लीवर ने ग्लिसरीन लगा कर गेंदबाजी की थी और पकड़ा गया था. चेन्नई में तीसरे टेस्ट में उसकी […]

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कैरी पैकर के जमाने से ही क्रिकेट खिलाड़ियों को पैसे का चस्का लग गया. उसके बाद से खेल में नैतिक-अनैतिक कुछ नहीं रहा. 1976-77 के भारत दौरे में टोनी ग्रेग की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाड़ी जान लीवर ने ग्लिसरीन लगा कर गेंदबाजी की थी और पकड़ा गया था. चेन्नई में तीसरे टेस्ट में उसकी चोरी पकड़ी गयी.

।।अनुज सिन्हा।।
(वरिष्ठ संपादक, प्रभात खबर)
क्रिकेट में पैसा है, ग्लैमर है, प्रतिष्ठा है. भले ही दुनिया के चंद देश ही क्रिकेट खेलते हों, पर अनेक देशों में यह खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कभी क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता था, पर अब ऐसा नहीं रहा. पैसे ने इसे बिगाड़ दिया है. खिलाड़ियों का चरित्र व व्यवहार बदल दिया है. अब वे मैच फिक्स करते हैं, पैसा लेते हैं. सट्टेबाजों से उनके रिश्ते हैं. जिस खेल के बूते वे लाखों-करोड़ों कमाते हैं (मैच फीस के साथ-साथ विज्ञापन से), उसी खेल की पवित्रता को खत्म करते हैं. अब खिलाड़ी हर हाल में जीतना चाहते हैं और इसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. खिलाड़ियों के बदलते व्यवहार का उदाहरण है, ओवल की घटना. क्या कोई क्रिकेटप्रेमी कभी सपने में भी सोच सकता है कि उनका हीरो (खिलाड़ी) जीत के बाद इतना गिर जाये कि बीच मैदान में अशोभनीय हरकत करने लगे, पिच पर पेशाब करने लगे.

लेकिन ऐसा हुआ है. हाल ही में आस्ट्रेलिया को 3-0 से हरा कर इंग्लैंड ने एशेज पर कब्जा किया. आस्ट्रेलिया के खिलाफ इतनी बड़ी जीत इंग्लैंड को लंबे समय बाद मिली थी, जश्न मन रहा था, पर जश्न मनाने का तरीका और भी हो सकता है. आम तौर पर ऐसी जीत के बाद इंग्लैंड के खिलाड़ी शैंपेन की बोतल खोल कर जश्न मनाते हैं. खिलाड़ियों को कंधे पर बैठा कर या कप लेकर मैदान का चक्कर काटते हैं. होटलों में पार्टी करते हैं. यह सब जायज है. लेकिन पिच पर बैठ कर शराब पीना और वहां पर पेशाब करना अभद्रता है. इंग्लैंड को क्रिकेट का जन्मदाता माना जाता है. अगर उसके तीन टेस्ट स्टार पीटरसन, एंडरसन और ब्राड ऐसी शर्मनाक हरकत करते हैं, तो न सिर्फ ये तीन खिलाड़ी बदनाम होते हैं, बल्कि इंग्लैंड की टीम या पूरी क्रिकेट बदनाम होती है. भले ही इंग्लैंड ने इस घटना के लिए माफी मांग ली हो, पर इससे इन खिलाड़ियों की प्रतिष्ठा नहीं लौटनेवाली. क्रिकेट के पीछे लोग पागल हैं. खिलाड़ियों को देखने के लिए दर्शक पुलिस की मार खाते हैं, पर आह तक नहीं करते. ऐसे खेलप्रेमियों को इन खिलाड़ियों ने निराश किया है.

क्रिकेट के प्रसिद्ध खिलाड़ी पहले भी विवाद में रहे हैं, पर दूसरे कारणों से. ऐसी ओछी हरकत के कारण नहीं. कभी मैच में किसी खिलाड़ी पर कोई कमेंट कर दिया, अपशब्द कह दिया, कोई बल्ला लेकर मारने के लिए दौड़ा, उंगली या आंखें दिखा दीं, कभी किसी को चिढ़ा दिया. ऐसी घटनाएं घटी हैं. क्रिकेट के खेल में तनाव बढ़ा है. वे हर हाल में जीत चाहते हैं. अगर जीत मिल जाती है, तो स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता. ऐसे तो कैरी पैकर के जमाने से ही क्रिकेट खिलाड़ियों को पैसे का चस्का लग गया. उसके बाद से खेल में नैतिक-अनैतिक कुछ नहीं रहा. 1976-77 के भारत दौरे में टोनी ग्रेग की कप्तानी में इंग्लैंड के खिलाड़ी जान लीवर ने ग्लिसरीन लगा कर गेंदबाजी की थी और पकड़ा गया था. चेन्नई में तीसरे टेस्ट में जब लीवर के ललाट की पट्टी गिरी, तब अंपायर ने पकड़ा था. 1981 में जब पाकिस्तानी खिलाड़ी जावेद मियांदाद और आस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज डेनिस लिली आपस में टकरा गये तो विवाद हुआ.

मियांदाद बल्ला लेकर लिली को मारने दौड़े थे. 1992 के वर्ल्ड कप में जब विकेटकीपर किरण मोरे ने जावेद मियांदाद के खिलाफ अपील की तो मियांदाद बंदर की तरह उछल-उछल कर मोरे को चिढ़ाते नजर आये थे. रिकी पोंटिंग ने दर्शकों को उंगली दिखायी थी. हाल ही में भारतीय खिलाड़ी कोहली अपने सहयोगी रवींद्र जडेजा की ओर हाथापाई के लिए बढ़े थे. ऐसे अनेक मामले हैं जो खिलाड़ियों के व्यवहार में आयी गिरावट को बताते हैं. हाल ही में उसी इंग्लैंड के स्पिनर मोंटी पनेसर ने नाइट क्लब में शराब पीकर हंगामा किया और वैसी ही ईल/अशोभनीय हरकत की, जो हरकत इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने पिच पर की थी. ऐसी ही हरकत न्यूजीलैंड के फुटबालर रसेल पैकर ने रग्बी लीग मैच में की थी और उसे 15 हजार डालर का दंड भरना पड़ा था. अगर ये खिलाड़ी नहीं सुधरे, तो खेल और खिलाड़ियों से लोगों का मोहभंग हो सकता है.

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