कैसे टूटेगा दुष्कर्मियों का मनोबल

।।दोषमुक्त हो रहे आरोपित।।पिछले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि आखिर व्यवस्था में कौन-सी कमजोरियां हैं, जिससे दुष्कर्म के 90 फीसदी आरोपित दोषमुक्त हो जा रहे हैं. कोर्ट ने राज्य सरकारों को पीड़िताओं के हित में राहत व पुनर्वास योजना बनाने व लागू […]
।।दोषमुक्त हो रहे आरोपित।।
पिछले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के एक पीठ ने दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि आखिर व्यवस्था में कौन-सी कमजोरियां हैं, जिससे दुष्कर्म के 90 फीसदी आरोपित दोषमुक्त हो जा रहे हैं. कोर्ट ने राज्य सरकारों को पीड़िताओं के हित में राहत व पुनर्वास योजना बनाने व लागू करने का निर्देश दिया. पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में छात्राके साथ दुष्कर्म के बाद देश भर में आंदोलन हुए, कड़े कानून बनाये गये , लेकिन उसके बाद भी दुष्कर्म की घटनाएं रुक नहीं रही हैं. महानगरों के अलावा अब छोटे कसबों में भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं.
हाल में मसौढ़ी में छात्र के साथ पड़ोसी युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया. ऐसे तो दुष्कर्म की घटनाएं न रुकने के लिए कोई एक कारण जिम्मेवार नहीं है, पर दोषियों को सजा दिला पाने में खामियां स्पष्ट हैं. लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि बिहार के विभिन्न न्यायालयों में 2012 में 4155 मामलों की सुनवाई हुई, जिसमें केवल 609 मामलों में ही सुनवाई पूरी हो सकी. चिंताजनक पहलू यह है कि इन चार हजार मामलों में से सिर्फ 119 मामलों में दोष सिद्ध हो सके, वहीं 490 आरोपित दोषमुक्त हो गये. साढ़े तीन हजार से ज्यादा मामले लंबित रह गये.
इन आंकड़ों के पीछे पूरे पुलिसतंत्र के काम करने का खोखलापन उजागर होता है. पिछले तीन वर्षो में 2329 मामलों का निबटारा हुआ, जिनमें 556 मामलों में आरोपितों को सजा मिली, जबकि 1773 मामलों में आरोपित दोषमुक्त हो गये. इसका मतलब साफ है कि केवल दुष्कर्म के खिलाफ कड़ा कानून बन जाने से ही स्थितियों में बदलाव नहीं आ जायेगा. दुष्कर्म की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त करना होगा. जांच एजेंसियों के कामकाज के तरीके को तेज व संवेदनशील बनाना होगा.
जांच एजेंसियों व पुलिस की रिपोर्ट में ऐसी खामियां रह जाती हैं, जो पीड़िता के खिलाफ जाती हैं और जिससे दुष्कर्म करनेवाले सजा पाने से बच जाते हैं. चूंकि कोर्ट में मामला लंबा चलता है और बार-बार गवाहियां होती हैं, जिससे पीड़िता का पक्ष धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जाता है और आखिर में आरोपित दोषमुक्त हो जाते हैं. दुष्कर्म की घटनाओं के बाद समाज थोड़े समय के लिए आंदोलित होता है, पर उसका समर्थन भी बाद में ठंडा पड़ जाता है. जरूरत है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य सरकारें पीड़िताओं को हर तरह से सहयोग देने के लिए आगे आये व जांच एजेंसियों को संवेदनशील व तेज बनाये, तभी ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है.
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