अब हर हाल में चेतना ही होगा

Published at :30 Aug 2013 2:11 AM (IST)
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अब हर हाल में चेतना ही होगा

।।दुष्कर्म की बढ़ती घटनाएं।।झारखंड के रांची जिले के बुंडू में एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना घटी है. कभी दिल्ली में, तो कभी मुंबई में दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कड़े कानून बने हैं, लेकिन दुष्कर्म की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं. झारखंड के […]

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।।दुष्कर्म की बढ़ती घटनाएं।।
झारखंड के रांची जिले के बुंडू में एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना घटी है. कभी दिल्ली में, तो कभी मुंबई में दुष्कर्म की घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है. कड़े कानून बने हैं, लेकिन दुष्कर्म की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं. झारखंड के संतालपरगना में तो एक के बाद एक घटना घट रही है. लातेहार में महिला सिपाही के साथ उस समय बलात्कार किया गया, जब वह अपने बहनोई का शव लेकर जा रही थी.

ऐसी अमानवीय घटना की कल्पना करना भी कठिन है. शोक के क्षणों में भी ऐसी वहशी हरकत! ये घटनाएं बता रही हैं कि हमारा समाज कहां चला गया है? कितना नैतिक पतन हो गया है? संस्कारों का लोप होना ऐसी घटनाओं के पीछे मुख्य कारण है. यह समाज और मीडिया के दबाव का असर है कि आजकल दुष्कर्म की कोई खबर सामने आते ही पुलिस हरकत में आ जाती है. बुंडू की घटना में भी सारे आरोपी 12 घंटे के अंदर पकड़ लिये गये. यह बताता है कि पुलिस अगर सक्रिय रहे, तो उसके लिए असंभव कुछ नहीं है. यह बात भी सही है कि हर घटना को रोक पाना पुलिस के वश में नहीं है, पर अपराधियों में पुलिस का भय होना जरूरी है. ऐसा तभी होगा जब दुष्कर्म और अन्य अपराधों के दोषियों को सजा मिले. और, यह काम तभी होगा जब पुलिस चौकस रहे.

सच यह है कि पुलिस का भय अपराधियों के मन से हट गया है. पुलिस गिरफ्तारी कर मामले को खत्म कर देती है. उसे अंजाम तक नहीं पहुंचा पाती. सबूत जुटाने और अदालत में मामले को मजबूती से आगे बढ़ाने में उसकी रुचि कम रहती है. दुष्कर्म के मामले में सजा सुनाये जाने की दर काफी कम है. इसे ठीक करना होगा. सिर्फ कानून बनाने से काम नहीं होगा, उसका उपयोग करना होगा. इसके साथ-साथ ऐसा माहौल बनाना होगा, जिसमें हर महिला स्वयं को सुरक्षित महसूस सके. यह काम किसी एक के वश का नहीं है, बल्कि पूरे समाज का है. बचपन से ही संस्कार डालना होगा. परिवार और बच्चों को समय देना होगा. उन्हें सही और गलत के बीच फर्क बताना, समझाना होगा. यह एक मानसिक बीमारी है और इस पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती है. हाल के दिनों में जिस तरीके से दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ी हैं, उससे चिंतित होना स्वाभाविक है. अब पानी सिर के ऊपर से बहने लगा है और यह

इसके निदान का सही समय है. पुलिस की सतर्कता और अदालतो से त्वरित न्याय ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में सहायक होंगे.

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