हमसे मगर हो न सका सौदा जमीर का

Published at :24 Aug 2013 3:13 AM (IST)
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हमसे मगर हो न सका सौदा जमीर का

17 साल पुरानी नीतीश जी की सियासी शादी बिना किसी लंबी मजबूरी का दौर आये आखिरकार टूट गयी. लगता है उनका नया इश्क इस कदर उन पर हावी हो उठा कि पुराने प्यार को सही स्पष्टीकरण देना तो दूर की बात, उसके साथ फरेब ही कर डाला. पुराने रिश्तेदारों के आंसुओं पर आखिर इनकी शहनाई […]

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17 साल पुरानी नीतीश जी की सियासी शादी बिना किसी लंबी मजबूरी का दौर आये आखिरकार टूट गयी. लगता है उनका नया इश्क इस कदर उन पर हावी हो उठा कि पुराने प्यार को सही स्पष्टीकरण देना तो दूर की बात, उसके साथ फरेब ही कर डाला.

पुराने रिश्तेदारों के आंसुओं पर आखिर इनकी शहनाई बज ही गयी. पुराने ससुराल को अनाथ कर अपने नये परिवार के भविष्य के सपने गढ़ते वह थकते नहीं दिखते. आखिर इनका नया इश्क कब और कहां परवान चढ़ा कि पुराने साथी को इसकी भनक तक लग सकी और उसे अपना पक्ष रखने से पहले ही धराशायी होना पड़ा.

आया तो बारंबार संदेशा अमीर का, हमसे मगर हो ना सका सौदा जमीर का’ – उन्होंने यह शेर बयां किया अपने पुराने प्यार को दिली अलविदा कहने के लिए. लेकिन नये इश्क पर सवाल खड़ा करता यह बयान खुद ही चीखचीख कर कह रहा हैहो हो उनका नया प्यार दमदार ही नहीं, मालदार भी है, जिसने इनकी आंखों में आशाओं की नयी ज्योति से ऐसा अभिभूत किया है कि वह दीवाने हो उठे हैं. जो भी हो, नयीनयी शादी आपको बहुतबहुत मुबारक हो.

रीना भारती : रातू, रांची

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