कर चोरी पर नकेल

Updated at : 17 Jul 2017 6:31 AM (IST)
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कर चोरी पर नकेल

नोटबंदी के बाद आयकरदाताओं की संख्या निश्चित होने से पहले हमारे देश में करीब दो करोड़ लोग आयकर देते थे. यह संख्या आबादी का महज 1.5 फीसदी हिस्सा है. सरकार का दावा है कि इस आंकड़े में 80 फीसदी की वृद्धि हुई है और 91 लाख नये आयकरदाता सूची में जुड़े हैं. लेन-देन, भुगतान और […]

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नोटबंदी के बाद आयकरदाताओं की संख्या निश्चित होने से पहले हमारे देश में करीब दो करोड़ लोग आयकर देते थे. यह संख्या आबादी का महज 1.5 फीसदी हिस्सा है. सरकार का दावा है कि इस आंकड़े में 80 फीसदी की वृद्धि हुई है और 91 लाख नये आयकरदाता सूची में जुड़े हैं. लेन-देन, भुगतान और कमाई के हिसाब-किताब को दुरुस्त करने तथा कर चोरी को रोकने के लिए सरकार ने नोटबंदी के दौरान उन खातों को खास तौर पर चिन्हित करने की कोशिश की थी जिनमें जमा की गयी रकम का वैध ब्यौरा नहीं दिया गया था. रिपोर्टों के अनुसार आयकर विभाग 5.56 लाख ऐसे खातों की जांच में जुटा हुआ है.
इसके अलावा 1.04 लाख लोगों की भी शिनाख्त की गयी है जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन में अपने एक से अधिक खातों की जानकारी नहीं दी. ‘ऑपरेशन क्लीन मनी’ नामक यह अभियान अभी जारी रहेगा. इन जांचों से न सिर्फ कर चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि इससे आय छुपानेवाले लोगों पर दबाव भी बढ़ेगा. यह सही है कि बड़ी आबादी निम्न आयवर्गीय है या फिर किसानी से संबद्ध है, पर दिसंबर, 2016 के आंकड़े इस विडंबना को भी रेखांकित करते हैं कि 10 लाख रुपये से ज्यादा की सालाना आमदनीवाले 24.4 लाख लोग हैं, पर हर साल औसतन 25 लाख कारें बिक जाती हैं जिनमें 30 हजार से अधिक महंगी लक्जरी गाड़ियां होती हैं. आयकर की कम वसूली सरकारी राजस्व के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है. वर्ष 2016 में सरकार का पूरा राजस्व, जिसमें अप्रत्यक्ष कर भी शामिल थे, सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) का महज 16.7 फीसदी था. अमेरिका में यह आंकड़ा 25.4 और जापान में 30.3 फीसदी है. ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्यवयन में परेशानियां आती हैं.
ऐसी उम्मीद जतायी जा रही है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद राजस्व वसूली बेहतर होगी. नयी व्यवस्था की सफलता के लिए भी यह जरूरी है कि कर चोरी या छुपाने के रवैये पर लगाम लगाया जाये. करदाताओं की श्रेणियों पर नजर डालें, तो एक बड़ी विसंगति सामने आती है.
वर्ष 2014-15 के एनएसएसओ के आंकड़े बताते हैं कि 25 फीसदी आयकर शीर्ष के महज 0.1 फीसदी यानी 23,932 लोगों ने जमा की थी, जबकि 90 फीसदी ने कुल मिलाकर 23 फीसदी का योगदान किया था. बहरहाल, यह संतोष की बात है कि सरकार कर चोरी को रोकने के लिए कदम उठा रही है, लेकिन इसके साथ सामूहिक जागरुकता भी जरूरी है कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए सभी सक्षम लोगों को कर चुकाना चाहिए.
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