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हरियाणा के पलवल में भैंस चुराने के शक़ में युवक की पीट-पीटकर हत्या

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
हरियाणा के पलवल में भैंस चुराने के शक़ में युवक की पीट-पीटकर हत्या
BBC

दिल्ली से सटे हरियाणा के पलवल में भैंस चुराने के शक़ में गुरुवार रात को एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.

स्थानीय पुलिस ने बीबीसी को बताया कि गुरुवार रात बहरोला गांव में कुछ लोगों की भीड़ ने भैंस चुराने के शक में तीन युवकों का पीछा किया. इनमें से दो युवक भाग गए, जबकि एक युवक को लोगों ने पकड़ लिया और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी.

पलवल के सदर थाने के एएसआई सुरेश कुमार इस मामले की जांच कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है.

मरने वाले की शिनाख़्त नहीं

एएसआई सुरेश कुमार ने बीबीसी संवाददाता अनंत अवस्थी को बताया, "रात के समय तीन युवक भैंसों की चोरी करने के लिए आए हुए थे. जब इन युवकों ने भैंसों के लिए लगाई गई मच्छरदानी खोली तो वहीं पर सो रहे भैंस पालने वाले जाग गए जिसके बाद दो लड़के भाग गए और एक लड़के को पकड़ लिया गया."

"इसके बाद इस लड़के पीटा गया. जांच में लड़के के शरीर में कई अंदरूनी चोटें पाई गई हैं. घटना में मरने वाले युवक की अब तक शिनाख़्त नहीं की जा सकी है. मारे गए युवक की उम्र लगभग 28 साल है."

मृतक व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के बाद पलवल के शव गृह में शिनाख़्त के लिए रखा जाएगा.

हरियाणा के पलवल में भैंस चुराने के शक़ में युवक की पीट-पीटकर हत्या
AFP

अब तक एक व्यक्ति गिरफ़्तार

सुरेश कुमार के मुताबिक़, इस मामले में अब तक रामकिशन (45) को गिरफ़्तार किया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है.

इससे पहले राजस्थान के अलवर में हरियाणा के नूँह के रहने वाले रकबर ख़ान को पीट-पीट कर मार डाला गया है.

रकबर पर आधी रात को भीड़ ने उस वक़्त हमला किया गया जब वो दो गायों के साथ पैदल हरियाणा जा रहे थे. इसके बाद अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई थी.

इससे कुछ समय पहले असम के कार्बी-आंग्लोंग ज़िले में भीड़ ने दो युवकों की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

पीएम मोदी और कोर्ट की हो रही अनसुनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की सर्वोच्च अदालत भीड़ द्वारा हो रही हिंसक घटनाओं को रोकने की बात कह चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने लिचिंग की घटनाओं पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था मॉब लिंचिंग को एक अलग अपराध की श्रेणी में रखा जाए और सरकार को इन्हें रोकने के लिए क़ानून बनाना चाहिए.

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था, "भय और अराजकता के मामले में, राज्य को सकारात्मक कार्य करना पड़ता है. हिंसा की अनुमति नहीं दी जा सकती है."

अदालत ने कहा, "लोकतंत्र के भयानक कृत्यों को एक नया मानदंड बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है और इसे सख्ती से दबाया जाना चाहिए."

सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी द्वारा गोरक्षकों की हिंसा पर जांच करने की मांग की याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी.

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