श्रीनगर के ट्यूलिप गार्डन की सैर

By Prabhat Khabar Digital Desk
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ट्रेवेलिंग

नीदरलैंड का राष्ट्रीय पुष्प ट्यूलिप हिमालय की ही पैदावार है. अगर आप सोच रहे हैं कि नीदरलैंड जाना महंगा सौदा है, तो हम आपको लिये चलते हैं हसीन फूलों के घर हिमालय में. बात हो रही एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन की, जो श्रीनगर में है.
कायनात काजी, सोलो ट्रेवेलर
बा त बसंत ऋतु की हो और फूलों की चर्चा न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. बसंत ऋतु का आगमन पूरी धरती को फूलों से भर देता है. ऐसे में अगर आप प्रकृति मां के नजदीक होना चाहते हैं, तो फूलों को देखने कश्मीर चले आइए. हिमालय का यह भाग घर है कुछ बेहद नायाब किस्म के फूलों का. आपको जानकार हैरानी होगी कि नीदरलैंड का राष्ट्रीय पुष्प ट्यूलिप असल में हिमालय की ही पैदावार है.
अगर आप सोच रहे हैं कि नीदरलैंड जाना थोड़ा महंगा सौदा है, तो हम आपको लिये चलते हैं इस हसीन फूल के घर हिमालय में. मैं बात कर रही हूं एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन की, जो श्रीनगर में स्थित है. श्रीनगर में हर साल बसंत ऋतु में ट्यूलिप फेस्टिवल मनाया जाता है. तो चलिए मेरे साथ फूलों की खोज में.
जबरवान पर्वतमाला के दामन में लगभग 12 हेक्टेयर में फैला यह बोटानिकल गार्डन बहुत खूबसूरत है. इस साल इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में 15 लाख ट्यूलिप लगाये गये हैं. इस ट्यूलिप गार्डन स्थापना सन् 2008 में की हुई थी. इसे देखने देश-विदेश से लाखों सैलानी हर वर्ष आते हैं.
कश्मीर घाटी ने मुगलों का एक लंबा दौर देखा है, इसलिए यहां के गार्डेंस पर पार्शियन स्थापत्यकला का प्रभाव देखने को मिलता है, जिसमें टैरेस गार्डन को पार्शियन हॉर्टिकल्चर का खास अंग माना जाता है. निशात बाग और शालीमार गार्डन भी इसी तर्ज पर बनाये गये हैं. और यहां का इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन भी उसी स्ट्रक्चर पर बना है. यहां तीन टैरेस हैं.
इस गार्डन को तैयार करने में पूरे 10 महीनों का वक्त लगता है. एक महीने के लिए इस गार्डन को खोला जाता है, जिसके बाद अगले सीजन के लिए गार्डन को दोबारा तैयार करने की कवायद शुरू हो जाती है. यहां जो ट्यूलिप हम देखते हैं, इन्हें उगाने के लिए हॉलैंड से ट्यूलिप बल्ब आयात किये जाते हैं. और जब फेस्टिवल के बाद गार्डन पब्लिक के लिए बंद हो जाता है,
तब बड़ी सावधानी से एक-एक ट्यूलिप बल्ब को सहेजने की कवायद शुरू की जाती है. इन्हें न सिर्फ अलग-अलग रंगों और प्रकारों के हिसाब से सहेजा जाता है, बल्कि अगले सीजन तक खराब न होने के लिए कोल्ड स्टोरेज में बड़ी सावधानी से रखा भी जाता है. यह पूरा काम फ्लोरीकल्चर डिपार्टमेंट के एक्सपर्ट्स की निगरानी में किया जाता है.
दोस्तों! ऐसा कौन होगा, जिसे फूल पसंद न हो? फूल प्रकृति मां का एक ऐसा तोहफा है, जो चुटकियों में आपका मूड फ्रेश कर देता है. आप कितने ही गुस्से में हों, फूल देखकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ ही जायेगी. यही बात वैज्ञानिक अनुसंधान भी कहते हैं. एक शोध के अनुसार, जो लोग फूलों के सानिध्य में रहते हैं, उनमें तनाव का स्तर लगातार घटता जाता है. वे ज्यादा खुश और संतुष्ट रहते हैं. फूल हमारे इमोशंस के लिए हीलर का काम करते हैं. स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू जर्सी में हुए एक शोध से ये जानकारियां मिली हैं.
फूल हमारी भावनाओं को प्रकट करने के लिए सबसे सशक्त माध्यम हैं. यह हमारे सभी प्रकार के भावों को अपने अलग-अलग रंगों से बड़े ही प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं. खुशी, उल्लास, भक्ति, प्रेम, समर्पण, शोक जैसे सभी अवसरों पर हम अलग-अलग प्रकार के फूलों का प्रयोग करते हैं. अगर बात हो ट्यूलिप्स की, तो कहने ही क्या हैं. हिमालय से निकल लंबी यात्रा कर ट्यूलिप नीदरलैंड का राष्ट्रीय पुष्प ट्यूलिप ऐसे ही नहीं बन गया. जिन देशों से होकर यह यूरोप पहुंचा, ट्यूलिप उनकी सभ्यता का भी अभिन्न अंग बना.
यहां फैले रंग-बिरंगे ट्यूलिप्स को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि इस इंद्रधनुषी छठा को बिखेरने में कितनी मेहनत की गयी है. इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन डल झील के बहुत नजदीक स्थित है. तीन लेवल पर बना यह ट्यूलिप गार्डन अपने में 46 प्रकार के ट्यूलिप्स का घर है. इस ट्यूलिप गार्डन के बीचों बीच गार्डन की खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए कई फाउंटेंस भी लगाये गये हैं. गार्डन में आनेवाले लोगों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया है.
इसलिए यहां एक छोटा सा फूड प्वॉइंट भी है. जहां जाकर आप कश्मीर के खास पकवान जैसे बाकरखानी, चॉकलेट केक और कश्मीरी कहवा का आनंद ले सकते हैं. इस गार्डन में साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखा गया है. ट्यूलिप के फूलों की क्यारियों के बीच में जाने की इजाजत किसी को नहीं है अलबत्ता आप इनके नजदीक तस्वीरें खिंचवा सकते हैं. यहां जगह-जगह सैलानियों के बैठने के लिए बेंच भी बनी हैं.
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