ePaper

लेखिका गीतांजलि श्री को 'रेत समाधि' के लिए बुकर पुरस्कार, हिंदी भाषा की पहली रचना को मिला यह सम्मान

Updated at : 27 May 2022 4:57 PM (IST)
विज्ञापन
लेखिका गीतांजलि श्री को 'रेत समाधि' के लिए बुकर पुरस्कार, हिंदी भाषा की पहली रचना को मिला यह सम्मान

टॉम्ब ऑफ सैंड प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है. गुरुवार को लंदन में एक समारोह में लेखिका ने कहा कि वह 'बोल्ट फ्रॉम द ब्लू' से पूरी तरह से अभिभूत थीं.

विज्ञापन

नई दिल्ली : सुप्रसिद्ध लेखिका गीतांजलि श्री को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से नवाजा गया है. उन्हें यह पुरस्कार टॉम्ब ऑफ सैंड (रेत की समाधि) के लिए दिया गया है. रेत समाधि हिंदी की पहली किताब है जिसे यह सम्मान हासिल हुआ है. रेत समाधि उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया है. यह पुस्तक दुनिया की 13 रचनाओं में शामिल थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की सूची में शामिल किया गया था.

बुकर पुरस्कार पाने वाली पहली हिंदी पुस्तक

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टॉम्ब ऑफ सैंड प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली किताब बन गई है. गुरुवार को लंदन में एक समारोह में लेखिका ने कहा कि वह ‘बोल्ट फ्रॉम द ब्लू’ से पूरी तरह से अभिभूत थीं. उन्होंने 50,000 जीबीपी का अपना पुरस्कार लिया और पुस्तक के अंग्रेजी अनुवादक डेजी रॉकवेल के साथ इसे साझा किया.

सपने भी नहीं था अंदाजा : गीतांजलि श्री

मीडिया से बातचीत करते हुए गीतांजलि श्री ने कहा कि मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कर सकती हूं. कितनी बड़ी बात है, मैं चकित, खुश, सम्मानित और विनम्र हूं. उन्होंने कहा कि मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं. उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार के मिलने से एक अलग तरह की संतुष्टि है. उन्होंने कहा कि रेत समाधि (टॉम्ब ऑफ सैंड) उस दुनिया के लिए एक शोकगीत है, जिसमें हम निवास करते हैं. बुकर निश्चित रूप से इसे कई और लोगों तक पहुंचाएगा.

पुस्तक में साहित्यिक परंपरा का निर्वहन

गीतांजलि श्री ने कहा कि मेरे और इस पुस्तक के पीछे हिंदी और अन्य दक्षिण एशियाई भाषाओं में एक समृद्ध और साहित्यिक परंपरा है. इन भाषाओं के कुछ बेहतरीन लेखकों को जानने के लिए विश्व साहित्य अधिक समृद्ध होगा. इस तरह की बातचीत से जीवन की शब्दावली बढ़ेगी. अमेरिका के वरमोंट में रहने वाली एक चित्रकार, लेखिका और अनुवादक रॉकवेल ने उनके साथ मंच साझा किया.

Also Read: गुल्लक फेम गीतांजलि कुलकर्णी का खुलासा, कभी हाउसवाइफ नहीं बनना चाहती थी, उनको मानती थी कमजोर
कथानक की मार्मिकता से निर्णायक मंडल मोहित

निर्णायक पैनल के अध्यक्ष फ्रैंक विने ने कहा कि आखिरकार, हम डेजी रॉकवेल के अनुवाद में गीतांजलि श्री की पहचान और अपनेपन के उपन्यास ‘टॉम्ब ऑफ सैंड’ की शक्ति, मार्मिकता और चंचलता से मोहित हो गए. उन्होंने कहा, यह भारत और विभाजन का एक चमकदार उपन्यास है, जिसकी मंत्रमुग्धता, करुणा युवा उम्र, पुरुष और महिला, परिवार और राष्ट्र को कई आयाम में ले जाती है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola