Pravasi Bharatiya Divas: महात्मा गांधी से जुड़ा है प्रवासी भारतीय दिवस, जानें इतिहास और उद्देश्य
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 09 Jan 2024 6:30 AM
प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी. 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस दिन को मनाने की घोषणा की थी. सबसे पहले प्रवासी भारतीय दिवस 2003 में मनाया गया था.
9 जनवरी को प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है. इस दिन उन सभी प्रवासी भारतीयों को सम्मान दिया जाता है, जो विदेशों में रहकर भारत का मान सम्मान बढ़ा रहे हैं. उनकी उपलब्धियों को इस दिन सम्मान दिया जाता है, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है. तो आइये सबसे पहले जानें कि प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाया जाता है.
प्रवासी भारतीय दिवस क्यों मनाया जाता है?
प्रवासी भारतीय दिवस का संबंध महात्मा गांधी से है. दरअसल 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे और देश में स्वतंत्रता आंदोलन की बिगुल फूंकी थी. महात्मा गांधी के आगमन और स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत करने की याद में हर साल इस दिन प्रवासी भारतीय दिवस मनाया जाता है.
क्या है प्रवासी भारतीय दिवस का इतिहास
प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी. 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस दिन को मनाने की घोषणा की थी. सबसे पहले प्रवासी भारतीय दिवस 2003 में मनाया गया था.
48 देशों में फैले हैं प्रवासी भारतीय, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम योगदान
एक आंकड़े के अनुसार करीब 48 देशों में प्रवासी भारतीय फैले हैं. जिनकी जनसंख्या करीब 2 करोड़ है. भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रवासी भारतीयों की बड़ी भूमिका है. विदेश में कमाई करके अपने देश में धन भेजने के मामले में भारतीय प्रवासी सबसे आगे हैं. विश्व बैंक के अनुसार 2020 में जब दुनिया कोरोना की मार से कराह रहा था, उस समय भारत को 83 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ था. 2021 में यह राशि बढ़कर 87 अरब डॉलर हो गई.
प्रवासी भारतीय दिवस मनाने के पीछे क्या है उद्देश्य
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विदेशों में खास उपलब्धियां हासिल करने वाले भारतीयों का सम्मानित करना.
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प्रवासी भारतीय और देशवासियों के बीच नेटवर्क बनाने के लिए एक मंच तैयार करना.
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देश के युवाओं को विदेश में रह रहे भारतीय से जोड़ा जा सके.
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इस दिन को मनाने के पीछे एक बढ़ा उद्देश्य है कि विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जाए.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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