वंदे भारत एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए खुशखबरी, 25 प्रतिशत तक कम होगा किराया, रेलवे बोर्ड ने दी जानकारी

रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन तक आम लोगों की पहुंच बनाना चाहता है. साथ ही यह सूचना भी थी कि छोटी दूरी वाली कुछ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सीटें अभी पूरी तरह से भर नहीं पा रही हैं. रेलवे किराये की समीक्षा कर रहा था और आज इस की घोषणा रेलवे द्वारा कर दी गयी है.
वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सहित सभी ट्रेनों के एसी चेयर कार एवं एक्जीक्यूटिव क्लास के किराये में 25 प्रतिशत तक की कमी की जायेगी. इस बात की जानकारी रेलवे बोर्ड की ओर से आज दी गयी है. रेल सेवाओं के अधिकतम इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय ने रेलवे मंडलों के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधकों को एसी सीट वाली ट्रेन के किराये में रियायत देने की शक्तियां प्रदान करने का फैसला किया है.
Fares of AC chair car, executive classes of all trains, including Vande Bharat, to be reduced by up to 25 pc: Rly Board
— Press Trust of India (@PTI_News) July 8, 2023
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ऐसी सूचना आयी थी कि वंदे भारत एक्सप्रेस के किराये में कटौती करने पर रेलवे विचार कर रहा है. इसकी वजह यह है कि रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन तक आम लोगों की पहुंच बनाना चाहता है. साथ ही यह सूचना भी थी कि छोटी दूरी वाली कुछ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सीटें अभी पूरी तरह से भर नहीं पा रही हैं. रेलवे किराये की समीक्षा कर रहा था और आज इस की घोषणा रेलवे द्वारा कर दी गयी है. हालांकि अभी यह जानकारी सामने नहीं आयी है कि किराये में कितनी कटौती होगी.
ऐसे में अगर आप भी ट्रेन से अक्सर यात्रा करते हैं, तो यह आपके लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है. पीटीआई के ट्वीट के अनुसार, भारतीय रेलवे ने किराये में 25 प्रतिशत तक की कटौती करने का ऐलान किया है. इससे ट्रेन से यात्रा करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी. आपको बता दें कि यह कटौती सभी ट्रेनों की एसी चेयर कार और एक्जीक्यूटिव क्लास के किराये पर लागू होगी. रेलवे बोर्ड के आदेश में सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत का किराया भी कम करने की बात कही गई है.
रेलवे बोर्ड के आदेश में कहा गया है, अनुभूति और विस्टाडोम बोगियों समेत एसी सीट वाली सभी ट्रेन की एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव श्रेणी में यह योजना लागू होगी. इसमें कहा गया है, रियायत मूल किराये पर अधिकतम 25 प्रतिशत तक हो सकती है. आरक्षण शुल्क, सुपरफास्ट सरचार्ज, जीएसटी जैसे अन्य शुल्क अलग से लिए जा सकते हैं। यात्रियों की संख्या के आधार पर किसी भी श्रेणी या सभी श्रेणियों में रियायत दी जा सकती है.
रेलवे बोर्ड की ओर से जारी किये गए आदेश में रेलवे के उन जोन से ट्रेनों में रियायती किराया योजना शुरू करने के लिए भी कहा गया है, जिनमें पिछले 30 दिनों के दौरान 50 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली थीं. रेलवे बोर्ड की ओर से यह फैसला तब लिया गया है, जब पिछले दिनों कुछ रूट की वंदे भारत ट्रेनों में सीट खाली रहने की रिपोर्ट सामने आयी थी. रिपोर्ट के मुताबिक, छोटी दूरी वाली वंदे भारत ट्रेनों में सीटें पूरी तरह भर नहीं पा रही हैं.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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