Uttarkashi Accident: कैसे चला Rescue, कैसे बाहर आए सुरंगवीर, देखें पूरी स्टोरी
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 19 Apr 2024 10:47 AM

Uttarkashi Accident: ‘रैट होल खनन’ तकनीक के विशेषज्ञ फिरोज कुरैशी और मोनू कुमार मलबे के आखिरी हिस्से को साफ कर उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों से मिलने वाले पहले व्यक्ति थे. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाए गए व्यापक अभियान के बाद सभी मजदूर कैसे बाहर आए देखें वीडियो में
Uttarkashi Accident: उत्तरकाशी (उत्तराखंड) के निर्माणाधीन टनल में 17 दिनों तक जिंदगी से लड़ने के बाद मंगलवार की रात 41 मजदूरों को दूसरी जिंदगी मिली. इससे देशभर में खुशी का माहौल है. मंगलवार शाम को जैसे ही मजदूरों के सुरंग से बाहर निकलने का सिलसिला शुरू हुआ पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ पड़ी. इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नजर आ रहे हैं. खबरों की मानें तो उन्होंने देहरादून में अपने आवास पर ‘इगास बग्वाल’ समारोह का आयोजन किया. इस दौरान सीएम धामी को जमकर डांस करते नजर आए. सफल रेश्क्यू ऑपरेशन की खुशी में मुख्यमंत्री धामी ने अपने आवास पर इगास बग्वाल का आयोजन किया था. मजदूरों को बाहर निकाले जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बौखनाग देवता का आभार जताया. जब मजदूर फंसे थे, तब सुरंग के बाहर बौखनाग की पूजा शुरू हो गई थी. देखें आखिर 17 दिनों तक कैसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन…
Also Read: Uttarakhand Tunnel Rescue Update: उत्तरकाशी टनल में फंसे मंजीत की मां के आंखों में खुशी के आंसू the workers were trapped, the worship of Boukhnag started outside the tunnel. See how the rescue operation went on for 17 days…
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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