6 साल से जेल में क्यों हैं उमर खालिद? जानें दिल्ली दंगे, JNU के नारे और गिरफ्तारी से अब तक की पूरी कहानी
उमर खालिद (Photo/X)
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद पिछले 6 सालों से जेल में हैं. उस पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की कथित साजिश का आरोप है. जानें मामले की पूरी जानकारी.
उमर खालिद रविवार को सोशल मीडिया पर चर्चा में है. दरअसल, 13 सितंबर 2020 को उमर खालिद को दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था और 13 सितंबर 2026 को गिरफ्तारी के 6 साल पूरे हो गए. जिसके चलते सोशल मीडिया पर उमर खालिद को लेकर अलग-अलग तरह की पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. आखिर कौन हैं उमर खालिद, किस मामले में गिरफ्तारी हुई थी और क्या है आरोप. आइए जानते हैं पूरा मामला.
2016 में चर्चा में आया उमर खालिद का नाम
उमर खालिद का नाम पहली बार देशभर में 2016 में चर्चा में आया था, जब दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी JNU में एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगाए जाने का मामला सामने आया. इसके बाद खालिद समेत कई छात्रों पर राजद्रोह समेत कई धाराओं में केस दर्ज हुआ जिसमें कन्हैया कुमार का नाम शामिल था.
हालांकि, बाद की जांच और अदालती कार्रवाई में इस मामले को लेकर कई सवाल भी उठे. दिल्ली सरकार की ओर से कराई गई एक जांच में कन्हैया कुमार के नारे लगाने का सबूत नहीं मिला था, जबकि उमर खालिद की भूमिका को लेकर जांच जारी रखने की बात कही गई थी.
लेकिन आज खालिद जिस मामले में जेल में हैं, वह 2016 का JNU मामला नहीं है. 13 सितंबर 2020 को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के पीछे कथित बड़ी साजिश के मामले में खालिद को गिरफ्तार किया गया. इस केस में UAPA के साथ हत्या, हत्या की कोशिश, दंगा, आपराधिक साजिश और अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस का आरोप है कि खालिद और दूसरे आरोपियों ने CAA के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान ऐसी साजिश तैयार की, जिसके बाद फरवरी 2020 में हिंसा हुई. सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश में भी चार्जशीट में लगाए गए इन आरोपों का उल्लेख है.
JNU के 'देशद्रोही नारे' का मामला क्या था?
2016 में JNU में अफजल गुरु की बरसी से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर भारत विरोधी और कश्मीर की आजादी से जुड़े नारे लगाए जाने का आरोप लगा था. इसी मामले में कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत कुछ छात्रों पर राजद्रोह का केस दर्ज किया गया था. बाद में इस मामले में जांच और वीडियो को लेकर भी विवाद हुआ. JNU की एक जांच समिति ने कहा था कि विवादित नारे लगाने वाले कुछ लोग बाहरी थे. इसी मामले में खालिद को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में जमानत मिल गई. 2021 में दिल्ली की एक अदालत ने इस केस में खालिद, कन्हैया कुमार और दूसरे आरोपियों को जमानत दी थी.
दिल्ली दंगा की क्या है कहानी?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा की शुरुआत CAA यानी नागरिकता संशोधन कानून के विरोध और समर्थन में चल रहे प्रदर्शनों के बीच बढ़े तनाव के बाद हुई. हिंसा 23 फरवरी से शुरू होकर कई इलाकों में फैल गई और इसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हुई. इस घटना में उमर खालिद पर गंभीर आरोप लगे. उमर खालिद की भूमिका को लेकर पुलिस का आरोप है कि वह केवल प्रदर्शन में शामिल व्यक्ति नहीं था, बल्कि कथित बड़ी साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था.
5 जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में पुलिस की चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा गया कि खालिद ने CAA/NRC के खिलाफ लोगों को जुटाने, WhatsApp ग्रुप और विरोध-प्रदर्शन की रणनीति बनाने तथा चक्का जाम के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई. पुलिस का आरोप है कि बाद में इसी रणनीति को हिंसा तक ले जाने की योजना का हिस्सा बनाया गया और 17 फरवरी 2020 को महाराष्ट्र के अमरावती में दिए भाषण के जरिए लोगों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने की अपील की गई.
हालांकि, खालिद की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है. बचाव पक्ष का कहना है कि वह दंगे के दौरान दिल्ली में मौजूद नहीं था और अमरावती का भाषण शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील था. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में जमानत के सवाल पर अभियोजन के आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानने के लिए पर्याप्त आधार बताया, लेकिन साथ ही साफ किया कि इन मुद्दों का अंतिम फैसला ट्रायल में होगा,जो अभी बाकी है.
कोर्ट ने क्या कहा है?
5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं. उसी फैसले में पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी गई. कोर्ट ने दोनों मामलों को दूसरे आरोपियों से अलग माना और उपलब्ध सामग्री के आधार पर जमानत देने से इनकार किया. जिससे मौजूदा स्थिति में वह आरोपी और अंडरट्रायल हैं.
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रास्ता रखा था कि संरक्षित गवाहों की गवाही होने के बाद या एक साल की अवधि पूरी होने पर, जो पहले हो, जमानत के लिए फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. जिसके बाद जुलाई 2026 में ट्रायल कोर्ट ने नई जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश के कारण सुनवाई योग्य नहीं माना. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट में फिर जमानत की कोशिश की गई.
ये भी पढ़ें: Trump on Iran War: मिडटर्म चुनाव के बाद खत्म हो जाएगी ईरान जंग? ट्रंप बोले- तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी
इस पर समर्थकों का क्या कहना है?
उमर खालिद के समर्थक और कई मानवाधिकार संगठन इस मामले को अलग नजर से देखते हैं. उनका तर्क है कि खालिद को छह साल से ज्यादा समय से जेल में रखा गया है, जबकि अभी तक ट्रायल में आरोप साबित नहीं हुए हैं. वे कहते हैं कि किसी व्यक्ति को इतने लंबे समय तक बिना अंतिम फैसला आए जेल में रखना न्याय की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है. समर्थकों का एक दूसरा तर्क यह है कि खालिद मुस्लिम है और सरकार के आलोचक रहे हैं और CAA के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय थे. इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया. अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठनों ने भी लंबे समय तक बिना ट्रायल खालिद को जेल में रखे जाने पर सवाल उठाए हैं.
हालांकि, दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामला धर्म या राजनीतिक विचारों के कारण नहीं, बल्कि कथित आपराधिक साजिश और हिंसा में भूमिका से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत के सवाल पर उपलब्ध केस सामग्री और आरोपियों की कथित भूमिका के आधार पर अलग-अलग फैसला किया.
खालिद के साथ कौन-कौन जेल गए और अब कहां हैं?
इस केस में खालिद और शरजील इमाम के अलावा गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर, मोहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद और खालिद सैफी समेत कई लोग आरोपी बनाए गए. 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान को जमानत दे दी, जबकि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिली. इसके बाद गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और मीरान हैदर जेल से बाहर आ गए. शादाब अहमद को भी जमानत मिली थी, लेकिन उस समय तक जमानत की औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई थीं.
इससे पहले नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा समेत कुछ दूसरे आरोपियों को भी 2021 में जमानत मिल चुकी थी. यानी एक ही केस में सभी आरोपियों की स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ जेल से बाहर हैं, कुछ को जमानत मिली है और उमर खालिद तथा शरजील इमाम अभी भी हिरासत में हैं.
छह साल बाद ट्रायल कहां तक पहुंचा?
खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था और 13 सितंबर 2026 को उसके गिरफ्तारी को 6 साल पूरे हो गए हैं. इसके बावजूद मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है. खालिद के समर्थक इसी लंबी हिरासत को सबसे बड़ा सवाल बताते हैं. दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि केस में बड़ी संख्या में गवाह और दस्तावेज हैं और मामला केवल एक व्यक्ति या एक भाषण का नहीं, बल्कि कथित बड़ी साजिश का है. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में भी उपलब्ध सामग्री के आधार पर खालिद और शरजील इमाम को दूसरे आरोपियों से अलग माना था.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए