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चीन की बढ़ती दबंगई को मिलकर रोकेंगे भारत-अमेरिका, जानिये दोनों देशों के बीच हुए समझौते का पूरा डिटेल्स

By Agency
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चीन की बढ़ती दबंगई को मिलकर रोकेंगे भारत-अमेरिका
चीन की बढ़ती दबंगई को मिलकर रोकेंगे भारत-अमेरिका
prabhat khabar

सीमा विवाद को लेकर चीन से चल रहे तनाव के बीच भारत और अमेरिका ने एक बड़े रक्षा समझौते पर दस्तखत किये हैं. इस 'बुनियादी आदान-प्रदान एवं सहयोग समझौते' (बीइसीए) के तहत अत्याधुनिक सैन्य प्रौद्योगिकी, उपग्रह के गोपनीय भू-स्थैतिक डाटा और दोनों देशों की सेनाओं के बीच अहम सूचनाएं साझा करने की अनुमति होगी. दोनों देशों के बीच मंगलवार को यहां हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यह समझौता हुआ. इसके साथ ही उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संबंधों और रणनीतिक सहयोग को और बढ़ाने का फैसला किया. इसी क्षेत्र में चीन अपना आर्थिक और सैन्य दबदबा बनाने की कोशिश में है.

पहले ही हो चुके हैं तीन रणनीतिक समझौते : रणनीतिक संबंधों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बीइसीए पर दस्तखत के साथ भारत-अमेरिका के बीच चार महत्वपूर्ण करारों को अंतिम रूप दे दिया गया. दोनों देशों ने जनरल सिक्युरिटी ऑफ मिलिट्री इनफॉर्मेशन एग्रीमेंट (जीएसओएमआइए) पर 2002 में दस्तखत किये थे. इसके बाद दोनों देशों ने 2016 में ‘लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' किया था. यह सैन्य साजोसामान को लेकर आपसी सहयोग से जुड़ा था. भारत और अमेरिका ने 2018 में एक और महत्वपूर्ण करार किया था जिसे ‘कोमकासा' कहा जाता है.

श्रीलंका रवाना हुए पोंपियो : अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो भारत से दो दिवसीय श्रीलंका यात्रा पर रवाना हो गये हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ते दबदबे को संतुलित करने के लिए वह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ वार्ता करेंगे. आज दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत होगी.

भारत पर जब भी खतरा अमेरिका साथ- पोंपियो : बीइसीए पर समझौते के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत यात्रा के दौरान वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सम्मान में बलिदान देने वाले शहीदों, जिनमें जून में गलवान घाटी में चीन की पीएलए द्वारा मारे गए 20 भारतीय सैन्यकर्मी भी शामिल हैं, को श्रद्धांजलि देने समर स्मारक भी गये. उन्होंने कहा, 'भारत के लोग जब अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता पर खतरे का सामना करते हैं, तो अमेरिका उनके साथ खड़ा होगा.'

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेता और नागरिक साफ देख पा रहे हैं कि सीसीपी लोकतंत्र, कानून के शासन और पारदर्शिता की मित्र नहीं है. पोंपियो ने कहा कि अमेरिका और भारत न सिर्फ सीसीपी द्वारा उत्पन्न, बल्कि सभी तरह के खतरों से निबटने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं.

Posted by: Pritish Sahay

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