ePaper

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी की मदद से दिल्ली में दो मरीजों का हुआ इलाज, मात्र 12 घंटे में मिली अस्पताल से छुट्टी, ये हैं फायदे...

Updated at : 09 Jun 2021 7:41 PM (IST)
विज्ञापन
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी की मदद से दिल्ली में दो मरीजों का हुआ इलाज, मात्र 12 घंटे में मिली अस्पताल से छुट्टी, ये हैं फायदे...

Srinagar: A doctor checks a patient using a machine at Defence Research and Development Organisation (DRDO)'s 500 bed COVID-19 hospital, with a capacity of 125 ICU beds and 375 beds with oxygen facility, after it was inaugurated by Lt Governor Manoj Sinha, at Khonomoh on the outskirts of Srinagar, Wednesday, June 9, 2021. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI06_09_2021_000135B)

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में कोरोना के दो मरीजों का इलाज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी के जरिये किया गया है और इसमें डॉक्टरों को सफलता भी मिली है. डॉक्टरों ने बताया कि इन मरीजों को थैरेपी देने के 12 घंटे बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल गयी.

विज्ञापन

दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में कोरोना के दो मरीजों का इलाज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी के जरिये किया गया है और इसमें डॉक्टरों को सफलता भी मिली है. डॉक्टरों ने बताया कि इन मरीजों को थैरेपी देने के 12 घंटे बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल गयी.

अस्पताल की डॉक्टर पूजा खोसला, सीनियर कंसल्टेंट मेडिसीन ने बताया कि 36 वर्षीय एक स्वास्थ्यकर्मी अस्पताल में तेज बुखार, खांसी, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और व्हाइट ब्लड सेल की कमी के बाद अस्पताल में भरती हुए थे. उन्हें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी दिया गया, जिसके बाद उनकी तबीयत में सुधार हुआ और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी.

दूसरे मरीज की आयु 80 वर्ष थी और वे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के शिकार थे. उन्हें तेज बुखार था. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी से इन्हें 12 घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गयी. नोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी का प्रयोग इबोला और एड्‌स जैसी बीमारियों के इलाज में पहले भी किया जा चुका है.

Also Read: Mumbai Rains : मुंबई में मानसून की दस्तक, भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल ट्रेनों का परिचालन बाधित, आईएमडी ने जारी किया रेड अलर्ट

डॉ पूजा खोसला ने कहा कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडी थैरेपी का इस्तेमाल अगर सही समय पर किया जाये तो इसकी मदद से मरीजों को अस्पताल में भरती होने से मुक्ति मिल सकती है. साथ ही जो लोग हाई रिस्क पर होते हैं उन्हें फायदा मिलता है. इस थैरेपी के उपयोग से स्टॉराइड के प्रयोग को कम किया जा सकता है, जिससे ब्लैक फंगस के हमले को रोका जा सकता है.

Posted By : Rajneesh Anand

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola