Article 370 हटने की तीसरी बरसी आज, तीन साल में 617 आतंकी हमले, 174 जवान शहीद

जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद यह घटकर 617 हो गई, जिसमें 174 जवान शहीद हुए और 110 आम नागरिकों ने जान गंवाई है. बता दें कि मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 के दिन ही जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की थी.
भारत के इतिहास में 5 अगस्त का दिन काफी अहम रहा है. केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की थी. बताते चले कि आर्टीकल 370 हटने के बाद से अब तक कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई है. जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जारी आकंड़ों के अनुसार साल 2016 से 2019 के बीच लॉ एंड ऑर्डर की 3686 घटनाएं हुई हैं. वहीं, आर्टिकल 370 निरस्त किए जाने के बाद से अब तक 438 घटनाएं हई हैं, जिसमें 124 आम लोगों ने जान गंवाई.
पुलिसीया आंकड़े के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने से पहले साल 2016 से 2019 के बीच 900 से अधिक आतंकी घटनाएं हुईं थी. इनमें 290 जवान शहीद हुए थे और 191 नागरिक की मौत हुई थी. वहीं 370 निरस्त होने के बाद यह घटकर 617 हो गई, जिसमें 174 जवान शहीद हुए और 110 आम नागरिकों ने जान गंवाई है.
हाल में सरकार ने लोकसभा में बताया था कि आतंकवादी हमलों की संख्या में काफी गिरावट आई है. एक सदस्य के सवाल के जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया था कि साल 2018 की 417 घटनाओं से कम होकर वर्ष 2021 में 229 हो गई. 2020 में जम्मू कश्मीर में 244 आतंकवादी घटनाएं घटीं जिनमें 62 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए तथा 106 घायल हो गए. इस अवधि में जम्मू-कश्मीर में 37 नागरिकों की जान गयी और 112 अन्य घायल हुए. साल 2021 में जम्मू कश्मीर में 229 आतंकी घटनाएं घटीं जिनमें 42 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए तथा 117 घायल हो गए.
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मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 के दिन ही जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने की घोषणा की थी. धारा 370 हटाए जाने के बाद से अब तक कई विपक्षी पार्टियों ने इस अनुच्छेद के हटाए जाने का विरोध किया. जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों की बात करें तो नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी लगातार धारा 370 को बहाल करने की मांग करती रही हैं. पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने धारा 370 को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोला है. मुफ्ती की मानें तो धारा 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर के हालात और ज्यादा खराब हुए हैं. वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला इसे हटाए जाने पर संविधान पर हमला बताया था. उन्होंने कहा था कि केंद्र की मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाकर भारत को दो भागों में बांटने का काम किया है.
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