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आतंकवाद, देश की सुरक्षा और विपक्ष पर PM मोदी का आज का संबोधन, जानें 10 बड़ी बातें

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
PM Narendra Modi
PM Narendra Modi
PTI

केवडिया (गुजरात) : सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती (Sardar Patel Birth Anniversary) पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आतंकवाद पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि आतंकवाद (Terrorism) से पूरी दुनिया संकट में है. सभी को एकजुट होना होगा. प्रधानमंत्री ने पुलवामा हमले (Pulwama Terrorist Attack) को याद करते हुए उसपर सवाल उठाने वालों को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि पुलवामा हमले पर सवाल उठाने वाले देश के बारे में सोचें.

उन्होंने बिना नाम लिए फ्रांस में आतंकी हमले के समर्थन में सड़क पर उतरे लोगों को भी निशाना बनाया. मोदी ने कहा कि कुछ लोग आतंकवाद के समर्थन में खुलकर सामने आये हैं. एक दूसरे कार्यक्रम में पीएम मोदी ने सिविल सेवा के प्रशिक्षुओं को समाज से जुड़ने की सलाह देते हुए कहा कि वह ऐसा करते हैं तो वही समाज उनकी शक्ति का सहारा बनेगा.

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी जो भी फैसला लें, वह देशहित में होना चाहिए और उससे देश की एकता और संप्रभुता मजबूत होनी चाहिए. प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मंसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी के भारतीय सिविल सेवा के 428 प्रशिक्षुओं से ‘आरंभ 2020' कार्यक्रम के तहत संवाद कर रहे थे.

पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें

1. भारत अपनी संप्रभुता और सम्मान को चुनौती देने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत रखता है. आतंकवाद के बढ़ते खतरे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होना होगा. पुलवामा हमले सच पाकिस्तान की संसद में उजागर हुआ.

2. देश आज रक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है तथा सीमाओं को लेकर अब भारत की नजर और नजरिया दोनों बदल गये हैं. आज भारत की भूमि पर नजर गड़ाने वालों को मुंहतोड़ जवाब देने की ताकत हमारे वीर जवानों के हाथों में है.

3. जब पूरा देश पुलवामा हमले के बाद दुखी था कुछ लोग ‘स्वार्थ और अहंकार से भरी भद्दी राजनीति' कर रहे थे. मन में एक और तस्वीर थी. यह तस्वीर थी पुलवामा हमले की. देश कभी भूल नहीं सकता कि जब अपने वीर बेटों के जाने से पूरा देश दुखी था, तब कुछ लोग उस दुख में शामिल नहीं थे.

4. अपने स्वार्थ के लिए, जाने-अनजाने आप देश-विरोधी ताकतों की हाथों में खेलकर, न आप देश का हित कर पायेंगे और न ही अपने दल का. जब हम सबका हित सोचेंगे, तभी हमारी भी प्रगति होगी, उन्नति होगी.

5. आतंकवाद और हिंसा से कभी किसी का कल्याण नहीं हो सकता. कुछ लोग आतंकवाद के समर्थन में खुलकर सामने आ गये हैं, वह आज मानवता के लिए, विश्व के लिए, शांति के उपासकों के लिए वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है.

6. आतंकवाद की पीड़ा को भारत भली-भांति जानता है. भारत ने आतंकवाद को हमेशा अपनी एकता से दृढ़ इच्छाशक्ति से जवाब दिया है. आशांति, भाईचारा और परस्पर आदर का भाव मानवता की सच्ची पहचान है. शांति, एकता और सद्भाव ही उसका मार्ग है.

7. देश की विविधता ही हमारी ताकत और अस्तित्व है. देश एकजुट है तो असाधारण हैं. हमारी इस विविधता को ही कुछ लोग हमारी कमजोरी बनाना चाहते हैं. ऐसी ताकतों को पहचानना जरूरी है, सतर्क रहने की जरूरत है.

8. सभी अवरोधों को पीछे छोड़कर जम्‍मू-कश्‍मीर अब विकास के मार्ग पर अग्रसर है तो पूर्वोत्‍तर क्षेत्र भी शांति समझौते के बाद विकास के रास्‍ते पर आगे बढ़ रहा है. आज देश एकता के नए आयाम स्थापित कर रहा है.

9. किसी सिविल सेवा अधिकारी के लिए सबसे पहले जरूरी है कि वह देश के सामान्य जन से निरंतर जुड़े रहे. जब आप लोगों से जुड़े रहेंगे तो लोकतंत्र में काम करना आसान हो जायेगा. समाज से कटिए मत, उससे जुड़िए. वह आपकी शक्ति का सहारा बनेगा.

10. सरकार शीर्ष से नहीं चलती है. नीतियां जिस जनता के लिए हैं, उनका समावेश बहुत जरूरी है. जनता केवल सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों की रिसीवर नहीं है, जनता जनार्दन ही असली ड्राइविंग फोर्स है.

भाषा इनपुट के साथ

Posted By: Amlesh Nandan.

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