देश में तैयार हुआ सर्जिकल रोबोट, सर्जरी के क्षेत्र में आयेगा क्रांतिकारी बदलाव

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विदेश में बने सर्जिकल रोबोट काफी महंगे होते हैं. ऐसे में भारत जैसे देश में यह आम लोगों की पहुंच से दूर हैं. लेकिन, अब इस दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देश में सर्जिकल रोबोट बनाने में सफलता हासिल की है और इसे दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में लगाया गया है.

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नयी दिल्ली (ब्यूरो): भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी प्रगति की है. अभी भी ऐसे कई मेडिकल उपकरण हैं, जिसका निर्माण भारत में नहीं होता है. विकसित देशों में कई ऑपरेशन सर्जिकल रोबोट से किया जाता है. भारत में इसकी संख्या लगभग 90 है. अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और जापान में विश्व के कुल 90 फीसदी सर्जिकल रोबोट हैं और बाकी बचे देशों में महज 10 फीसदी.

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राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में लगाया गया सर्जिकल रोबोट

विदेश में बने सर्जिकल रोबोट काफी महंगे होते हैं. ऐसे में भारत जैसे देश में यह आम लोगों की पहुंच से दूर हैं. लेकिन, अब इस दिशा में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. देश में सर्जिकल रोबोट बनाने में सफलता हासिल की है और इसे दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में लगाया गया है. अगले हफ्ते से इस रोबोट से ऑपरेशन शुरू कर दिया जायेगा.

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एसएसआई मंत्रा ने बनाया स्वदेशी सर्जिकल रोबोट

स्वदेशी सर्जिकल रोबोट एसएसआई मंत्रा ने बनाया है. विश्व प्रसिद्ध रोबोटिक कार्डियक सर्जन डॉक्टर सुधीर पी श्रीवास्तव इस कंपनी के नेतृत्वकर्ता हैं और गुरुवार को इसे लांच किया गया. इससे देश में रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आयेगा और यह आम लोगों को भी सस्ती कीमत पर हासिल हो सकेगा, क्योंकि विदेशी सर्जिकल रोबोटिक मशीन की कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये है, जबकि स्वदेशी निर्मित रोबोट की कीमत 5-7 करोड़ रुपये ही है.

राजीव गांधी कैंसर संस्थान में किया गया मंत्रा सर्जिकल रोबोट का ट्रायल

राजीव गांधी कैंसर संस्थान में मंत्रा सर्जिकल रोबोट का ट्रायल किया गया. ट्रायल के दौरान इससे लगभग 20 से अधिक सर्जरी की गयी, जो पूरी तरह सफल रही. इसकी खासियत यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी है. इसमें चार वर्किंग आर्म्स लगाये गये हैं. स्टेक वर्किंग आर्म में कैमरा लगाया गया है. कैमरे की तस्वीर देखने के लिए एक बड़ा एलईडी स्क्रीन लगाया गया है.

रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की खासियत

डॉक्टरों का कहना है कि रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की खास बात यह है कि इसमें सर्जरी के लिए बहुत बड़े कट लगाने की आवश्यकता नहीं है. इससे मरीज को परेशानी भी कम होती है और ठीक होने में समय भी कम लगता है. साथ ही इससे जटिल ऑपरेशन करने में आसानी होती है. इस मौके पर डॉक्टर सुधीर पी श्रीवास्तव ने कहा कि इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप की यात्रा आसान नहीं होती है.

सिस्टम से दूसरे देशों को होगा फायदा

वर्ष 2011 में अमेरिका से वापस भारत आने पर उन्होंने सोचा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा आम लोगों की पहुंच से दूर है. ऐसे में उनके मन में सस्ता और गुणवत्तापूर्ण उपकरण बनाने की सोच आयी और पूरी टीम ने मिलकर इस सपने को साकार कर दिया. इस सिस्टम से दूसरे देशों को फायदा होगा. यह उपकरण काफी प्रभावी और चलाने में भी आसान है.

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