कैबिनेट का फैसला: सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, 34 से 38 होगी संख्या, संसद में आएगा बिल

Published by :Pritish Sahay
Published at :05 May 2026 9:01 PM (IST)
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Supreme Court Judges

सुप्रीम कोर्ट, फोटो- पीटीआई

Supreme Court Judges: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत न्यायाधीशों की संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी. जजों की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा.

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Supreme Court Judges: मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. फिलहाल मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट में कुल 34 जज होते हैं, अब इस संख्या को बढ़ाकर 38 करने का लक्ष्य रखा गया है.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा- वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 33 न्यायाधीश और एक प्रधान न्यायाधीश हैं. इस संख्या को चार और बढ़ाने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा. संसद द्वारा विधेयक पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की संख्या 38 हो जाएगी.

1956 का कानून

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या अधिनियम 1956 के तहत प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर अधिकतम 10 न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या संशोधन अधिनियम, 1960 के जरिए जजों की संख्या बढ़ाकर 13 कर दी गई. कुछ सालों के बाद एक और संशोधन के जरिये सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 17 की गई.

1986 का संशोधन

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या संशोधन अधिनियम 1986 के तहत प्रधान न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी गई. इसके बाद 2009 में एक नए संशोधन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई.

2019 में अंतिम बड़ा संशोधन

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम के तहत एक बार फिर जजों की संख्या बढ़ाई गई. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 कर दी गई.

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला बढ़ते न्यायिक बोझ को देखते हुए लिया गया है. लंबित मामलों के कारण न्याय में देरी बड़ी समस्या बनती जा रही है. इससे संविधान पीठ और संवैधानिक मामलों की सुनवाई तेज होगी और अधिक पीठ बनने से मामलों का निपटारा भी समय पर संभव हो सकेगा.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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