सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को दी जमानत, रिनिकी भुइयां सरमा के आरोपों पर जांच जारी रहेगी

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा

Pawan Khera : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एंटीसिपेटरी बेल मिल गया है. बेल मिलने के बाद दिल्ली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया. पवन खेड़ा ने बेल मिलने के बाद कहा कि यह बाबा साहेब के संविधान की जीत है.

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Pawan Khera : पवन खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाबा साहेब का संविधान किसी भी आम नागरिक की रक्षा के लिए तब आता है जब कोई भी सरकार उसके अधिकारों का उल्लंघन करती है. उन्होंने कहा कि जब भी हम लड़ाई के मैदान से जाते हैं, तो हम छिपते नहीं हैं बल्कि अगली लड़ाई की तैयारी करते हैं.

पवन खेड़ा को किस मामले में मिली बेल?

पवन खेड़ा का मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा हुआ है, लेकिन बाद में यह मानहानि और फर्जी जानकारी फैलाने के केस में बदल गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पवन खेड़ा को राहत दी है,लेकिन उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी. पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर यह आरोप लगाया था कि उनके पास कई देशों के पासपोर्ट और विदेशों में संपत्ति हैं.इस आरोपों के बाद विवाद शुरू हुआ और पवन खेड़ा पर एफआईआर दर्ज कराया गया, जिसमें मानहानि और फर्जी जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया. इसी केस में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी, जिसमें उन्हें राहत मिल गई.

विधानसभा चुनावों में निर्णायक जनादेश आएगा

पवन खेड़ा ने मीडया से बात करते हुए कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि ज़ुल्मी सरकारों के खिलाफ एक निर्णायक जनादेश आ रहा है.वे भूल जाते हैं कि 2008-2009 में आडवाणी जी ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा था. वे खुद भूल जाते हैं कि उन्होंने चुनाव आयोग से क्या सवाल पूछे थे और हमने उनका जवाब दिया.उस समय का चुनाव आयोग और आज का चुनाव आयोग, उस समय की सरकार और आज की सरकार, कोई तुलना मुमकिन नहीं है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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