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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण ने न्यायिक प्रणाली में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर जताई चिंता

Updated at : 04 Sep 2021 9:12 PM (IST)
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण ने न्यायिक प्रणाली में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर जताई चिंता

Supreme Court Collegium चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण (CJI NV Ramana) की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक अप्रत्याशित फैसले के तहत इलाहाबाद, राजस्थान एवं कलकत्ता समेत 12 हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक बार में 68 नामों की सिफारिश की है.

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Supreme Court Collegium शीर्ष अदालत ने देशभर की उच्च अदालतों में रिक्त पड़े न्यायाधीशों के पदों पर नियुक्ति के लिए एक साथ 68 नामों की सिफारिश की है. देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण (CJI NV Ramana) की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने एक अप्रत्याशित फैसले के तहत इलाहाबाद, राजस्थान एवं कलकत्ता समेत 12 हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक बार में 68 नामों की सिफारिश की है. इन हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की काफी कमी है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमण ने बड़ी संख्या में रिक्त पड़े न्यायाधीशों के पदों को बड़ी चुनौती करार देते हुए शनिवार को उम्मीद जताई की सरकार उच्च न्यायालयों में नियुक्तियों के लिए कोलेजियम द्वारा अनुशंसा किए गए नामों को तेजी से मंजूरी सुनिश्चित करेगी, जैसा कि उसने शीर्ष अदालत में नियुक्तियों के लिए किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना निगम गठित करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और जल्द ही सरकार को यह भेजा जाएगा.

सीजेआई ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उन्हें सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली आधारभूत अवसंरचना, प्रशासनिक कर्मियों की कमी और बड़ी संख्या में न्यायाधीशों की रिक्तियों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों के लिए सीजेआई ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय कानून मंत्री को कोलेजियम के अनुशंसा पर शीर्ष अदालत में नौ न्यायाधीशों की नियुक्ति को जेट स्पीड की गति से मंजूरी देने के लिए धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री, कानून मंत्री और भारत सरकार को नामों को मंजूरी देने के लिए धन्यवाद देता हूं.

सीजेआई ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार नामों को यथाशीघ्र मंजूर करेगी, जिस तरह से शीर्ष अदालत से नौ नामों को मंजूरी दी गई. हम सभी उच्च न्यायालयों में इस समय खाली करीब 41 प्रतिशत रिक्तियों को भरने की चुनौती पर खरा उतरने की उम्मीद करते हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले महीने तक 90 प्रतिशत रिक्त पदों पर भर्ती हो जाएगी. सीजेआई ने न्यायिक प्रणाली में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर भी चिंता जताई.

उन्होंने कहा कि पहले उन्होंने देखा था कि अदालत में महिला अधिवक्ताओं के लिए शौचालय तक की सुविधा नहीं थी. उन्होंने कहा, स्वतंत्रता के 75 साल के बाद उम्मीद की जाती है कि कम से कम 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का सभी स्तर पर हो, लेकिन मैं स्वीकार करता हूं कि बड़ी मुश्किल से हम 11 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व उच्चतम न्यायालय की पीठ में प्राप्त कर सके.

चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने शुक्रवार को एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए एक साथ 68 नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी. इससे इलाहाबाद, राजस्थान और कलकत्ता समेत इन सभी 12 हाईकोर्ट में रिक्त पदों के कारण बड़ी संख्या में लंबित हो रहे मुकदमों की परेशानी दूर हो पाएगी. कॉलेजियम ने 25 अगस्त और 1 सितंबर को अपनी बैठकों में हाई कोर्ट्स में जजों के तौर पर पदोन्नति के लिए 112 उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया था. सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि उनमें 68 के नामों को 12 हाई कोर्ट के लिए स्वीकृति प्रदान की गई, उनमें 44 बार से और 24 न्यायिक सेवा से हैं.

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एएम खानविलकर की मौजूदगी वाली तीन सदस्यीय कॉलेजियम की तरफ से भेजे गए नामों में मिजोरम से पहली बार एक महिला न्यायिक अधिकारी मार्ली वानकुंग का नाम भी शामिल है, जिन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट में जज बनाए जाने की सिफारिश केंद्र सरकार से की गई है. मार्ली अनुसूचित जनजाति समुदाय से आती हैं. सूत्रों का कहना है कि मार्ली के अलावा भी विभिन्न हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किए जाने के लिए नौ अन्य महिला न्यायिक अधिकारियों को नामित किया गया है.

कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 16 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की संस्तुति की है. इनमें से 13 अधिवक्ता और 3 न्यायिक सेवा से है. अधिवक्ता से नियुक्त होने वालों में चंद्र कुमार राय, शिशिर जैन, कृष्ण पहल, समीर जैन, आशुतोष श्रीवास्तव, सुभाष विद्यार्थी, बृजराज सिंह, श्री प्रकाश सिंह, विकास बुधवार, विक्रम डी चौहान, रिशद मुर्तजा, ध्रुव माथुर व विमलेंदु त्रिपाठी और न्यायिक सेवा से ओमप्रकाश त्रिपाठी, उमेश चंद्र शर्मा व शैयद वैज मियां शामिल हैं. न्यायिक सेवा की संस्तुति पुनर्विचार के लिए की गई है. गौरतलब है कि अगर इन नामों पर केंद्र मुहर लगा देता है तो ये जज इलाहाबाद, राजस्थान, कलकत्ता, झारखंड, जम्मू कश्मीर, मद्रास, पंजाब-हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल, छत्तीसगढ़ और असम हाई कोर्ट में नियुक्त किए जाएंगे.

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