हिमाचल प्रदेश के गांव में श्रद्धा की हत्या करने वाला था आफताब? जांच के लिए तोष पहुंची पुलिस टीम

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 28 Nov 2022 12:24 PM

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Mumbai: Students from the Gurukul Art School pay tribute to Shraddha Walker, who was murdered by her boyfriend Aftab Ameen Poonawala in Delhi, in Mumbai, Tuesday, Nov. 15, 2022. (PTI Photo/Shashank Parade)(PTI11_15_2022_000221B)

श्रद्धा वालकर हत्या मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की शेष ‘पॉलीग्राफ' जांच अगले दो दिन में की जाएगी और ‘नार्को' विश्लेषण पांच दिसंबर को हो सकता है. मामले में जांच जारी है.

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क्या श्रद्धा वालकर को आफताब पूनावाला हिमाचल प्रदेश में ही मारने वाला था ? दरअसल, दिल्ली पुलिस की एक टीम तोष पहुंची है. यहां के सुदूर गांव में पुलिस इस एंगल की जांच कर रही है. पुलिस पार्वती वैली और कसौल में जांच कर रही है. ऐसी बात सामने आ रही है कि आफताब अपनी लिव इन पर्टनर श्रद्धा के साथ अप्रैल के महीने में यहां आया था. यहां वे एक गेस्ट हाउस में रुके थे लेकिन राजिस्टर में इंट्री नहीं की गयी थी. यहां बस आधार कार्ड की कॉपी कपल ने दी थी.

हत्या की साजिश रची गयी कसौल में

ऐसी संभावना जतायी जा रही है कि पुलिस को पहले से शक है कि आफताब ने श्रद्धा की हत्या एक साजिश के तहत प्लान बनाकर की है. इसलिए मुमकिन है कि आफताब ने हत्या की साजिश कसौल में रच ली हो. यही वजह है कि जांच के लिए पहुंची टीम कसौल और तोष गांव के एक-एक होटल के रजिस्टर खंगालने में जुटी हुई है.

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श्रद्धा और आफताब व्हाइट लोटस में रुके

अंग्रेजी बेवसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक खबर दी है जिसके अनुसार यहां श्रद्धा और आफताब जहां रुके थे, वहां पेमेंट अलग अलग किया था. आफब ने व्हाइट लोटस नाम के गेस्ट हाउस में 760 रुपये का भुगतान किया था जबकि श्रद्धा ने 820 रुपये यूपीआई के माध्यम से भुगतान किया था. आफताब, श्रद्धा के साथ हिमाचल के तोष गांव के होटल व्हाइट लोटस में रुका था. खबरों की मानें तो ये कपल 7 अप्रैल को ट्रेकिंग के लिए कुटला निकल गया और 8 अप्रैल को दोनों वापस आये. दोनों ने मिलकर होटल के मालिक कमल चंद को पेमेंट किया और वहां से निकल गये.

आफताब और श्रद्धा 6 अप्रैल को गेस्ट हाउस पहुंचे

होटल के मालिक कमल चंद ने बताया कि आफताब और श्रद्धा 6 अप्रैल को गेस्ट हाउस पहुंचे. यहां वे दो दिन तक रुके. उन्होंने कहा कि दोनों दो बेड वाला एक कमरा लिया. आफताब ने अपना आधार कार्ड दिया लेकिन रजिस्टर में इंट्री नहीं की. उन्होंने कहा कि दोनों एकदम नॉर्मल थे. हमें कोई संदेहास्पद चीज नहीं नजर आयी. गेस्टहाउस छोड़कर दोनों कहां गये ये पता नहीं.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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