श्रद्धा के पिता विकास वाॅकर आये मीडिया के सामने, कहा-पुलिस ने मदद की होती, तो मेरी बेटी आज जिंदा होती

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श्रद्धा के पिता विकास वाॅकर आये मीडिया के सामने, कहा-पुलिस ने मदद की होती, तो मेरी बेटी आज जिंदा होती

विकास वाॅकर ने प्रेस काॅन्फ्रेंस से पहले महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने हमें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है.

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Shraddha murder case : श्रद्धा के पिता विकास वाॅकर ने आज प्रेस काॅन्फ्रेंस कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की बर्बर हत्या हुई. वसई पुलिस की वजह से मुझे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा है. अगर उन्होंने मेरी मदद की होती, तो मेरी बेटी जिंदा होती

विकास वाॅकर ने की देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात

विकास वाॅकर ने प्रेस काॅन्फ्रेंस से पहले महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस ने हमें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया है. साथ ही दिल्ली पुलिस ने भी हमें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है.

दो साल से नहीं हुई थी श्रद्धा से बातचीत

मीडिया से बात करते हुए श्रद्धा के पिता ने कहा कि मैंने अपनी बेटी से बात करने की कोशिश की लेकिन पिछले दो सालों में उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया. मुझे कभी नहीं बताया गया कि मेरी बेटी के साथ क्या हो रहा है.

आफताब ने श्रद्धा के बारे में नहीं दी जानकारी

आखिरी बार मेरी श्रद्धा से 2021 में बात हुई थी.मैंने उससे जानना चाहा कि वह कहां है, तब उसने मुझे बताया कि वह बेंगलुरु में रहती है. मैंने 26 सितंबर को आफताब से बात की जब मैंने उनसे अपनी बेटी के बारे में पूछा तो उन्होंने इस पर कोई जवाब नहीं दिया.

आफताब को मिले मौत की सजा

श्रद्धा के पिता विकास ने आफताब के लिए मौत की सजा की मांग की है. उन्होंने मांग की कि उनकी बेटी के हत्यारे को फांसी की सजा दी जाये. साथ ही उन्होंने डेटिंग एप पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की.

आफताब की न्यायिक हिरासत बढ़ाई गयी

श्रद्धा हत्याकांड के मुख्य आरोपी आफताब की न्यायिक हिरासत आज साकेत कोर्ट ने बढ़ा दी है. उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. आफताब श्रद्धा का लिव इन पार्टनर था. उसपर यह आरोप है कि उसने कुछ महीने पहले श्रद्धा की हत्या करके उसके लाश के 35 टुकड़े कर दिये थे. आफताब ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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