Shraddha Murder Case: क्यों आया आफताब के घर के पानी का बिल ज्यादा ? पड़ोसियों ने बतायी वजह
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 17 Nov 2022 11:36 AM
**EDS: VIDEO GRAB** New Delhi: Aaftab Amin Poonawala, accused to have murdered his live-in partner Shraddha Walkar, being brought to the Mehrauli forest area, in New Delhi, Tuesday, Nov. 15, 2022. Poonawalla allegedly chopped Walkar's body into nearly 35 pieces, kept them in a fridge for almost three weeks and then dumped them across the city over several days, according to police. (PTI Photo)(PTI11_15_2022_000069A)
Shraddha Murder Case: पुलिस सारे साक्ष्य जुटा रही है. उन्हें जानकारी मिली है कि आफताब-श्रद्धा का 300 रुपये का पानी का बिल बकाया है. जानें मामले में क्या है ताजा अपडेट
Shraddha Murder Case: दिल्ली के श्रद्धा हत्याकांड की जांच जारी है. मामले में रोज नये खुलासे हो रहे हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई ने अपने सूत्रों के हवाले से एक खबर दी है जिसने सबको चौंका दिया है. दिल्ली पुलिस सूत्र के हवाले से जो बात सामने आयी है उसके अनुसार हत्या के बाद आफताब ने खून के धब्बों को साफ करने के लिए बहुत सारे पानी का इस्तेमाल किया, जिसके कारण पानी का बिल ज्यादा आया. पानी का बिल भरा नहीं गया है. मामले को लेकर पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि आफताब नियमित रूप से बिल्डिंग की पानी की टंकी की जांच करने जाता था.
श्रद्धा हत्याकांड को लेकर दिल्ली पुलिस सूत्र ने जानकारी दी है कि पुलिस आज आरोपी आफताब पूनावाला को साकेत कोर्ट में पेश करेगी और उसकी आगे की हिरासत की मांग करेगी. पुलिस सारे साक्ष्य जुटा रही है. उन्हें जानकारी मिली है कि आफताब-श्रद्धा का 300 रुपये का पानी का बिल बकाया है.
श्रद्धा हत्याकांड | दिल्ली पुलिस आज आरोपी आफताब पूनावाला को साकेत कोर्ट में पेश करेगी और उसकी आगे की हिरासत की मांग करेगी। पुलिस सारे साक्ष्य जुटा रही है। उन्हें जानकारी मिली है कि आफताब-श्रद्धा का 300 रुपये का पानी का बिल बकाया है: दिल्ली पुलिस सूत्र
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 17, 2022
इधर श्रद्धा हत्याकांड की जांच कर रहे अधिकारी ने कहा है कि पुलिस छतरपुर इलाके में एक सीसीटीवी कैमरे से कुछ फुटेज बरामद करने में कामयाब रही है. फुटेज में संदिग्ध की हरकतें दिख रही हैं, लेकिन स्पष्ट नहीं हैं. दृश्यों को आपस में जोड़ने और आफताब द्वारा इस्तेमाल किये गये रास्ते का पता लगाने के लिए सीसीटीवी मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. मई से अब तक के सभी सीसीटीवी फुटेज का पता लगाना और उसे हासिल करना मुश्किल होगा क्योंकि ज्यादातर सिस्टम में स्टोरेज क्षमता नहीं है.
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न्यूज एजेंसी ANI से श्रद्धा के पिता विकास वॉकर ने कहा कि दिल्ली पुलिस को आभास हो गया था कि आफताब कभी झूठ बोलता है और कभी सच कहता दिखता है, इसलिए उन्होंने नार्को टेस्ट के लिए आवेदन किया है. श्रद्धा के पिता ने आगे कहा कि मुझे लग रहा है कि मुझे न्याय मिलने वाला है. यदि उसने अपराध किया है, तो उसे फांसी दी जानी चाहिए. मैं तब तक चैन से नहीं बैठने वाला हूं जब तक आफताब को मौत की सजा नहीं दी जाती.
श्रद्धा के पिता ने कहा कि मुझे हमेशा लगा कि वह झूठ बोल रहा है, मैंने मुंबई और दिल्ली पुलिस से कहा था. आफताब शातिर दिमाग का है. वो पिछले 5-6 महीने में सबूत मिटा चुका है. ऐसे में पुलिस को सच्चाई सामने लाने में थोड़ी दिक्कत होगी.
भाषा इनपुट के साथ
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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