Shraddha Murder Case: आफताब ने समय काटने के लिए मांगा उपन्यास, जेल प्रशासन ने थमाया ‘द ग्रेट रेलवे बाजार’

तिहाड़ जेल सूत्रों से खबर आ रही है कि श्रद्धा वालकर मर्डर केस के आरोपी आफताब ने जेल प्रशासन से कुछ डिमांड की है. सूत्रों के अनुसार आरोपी आफताब ने तिहाड़ प्रशासन से पढ़ने के लिए उपन्यास और साहित्य की किताबें मुहैया कराने की मांग की है.
श्रद्धा वालकर हत्याकांड के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला का पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट पूरा हो चुका है. जिसमें उसने पूछताछ में एक समान उत्तर दिये. इधर आरोपी आफताब को लेकर खबर आ रही है कि उसने जेल प्रशासन से समय काटने के लिए उपन्यास और साहित्य की किताबें मांगी है. जिसपर अधिकारियों ने पहल करते हुए उसकी मांग पूरी भी कर दी है.
तिहाड़ जेल प्रशासन से किताबों की मांग कर रहा आरोपी आफताब
श्रद्धा वालकर मर्डर केस के आरोपी आफताब ने तिहाड़ प्रशासन से पढ़ने के लिए उपन्यास और साहित्य की किताबें मुहैया कराने की मांग की थी. इधर श्रद्धा के हत्यारे की मांग पूरी करते हुए जेल अधिकारियों ने उसे किताब थमा दी है. किताब का नाम है द ग्रेट रेलवे बाजार.
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Shraddha murder case: On his request for a book, Tihar Jail authorities provide accused Aaftab 'The Great Railway Bazaar'
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#ShraddhaMurderCase #ShraddhaWalkarCase #AaftabAminPoonawala pic.twitter.com/QvZ0kenCmR— ANI Digital (@ani_digital) December 3, 2022
जानें द ग्रेट रेलवे बाजार के बारे में
बाय ट्रेन थ्रू एशिया अमेरिकी उपन्यासकार पॉल थेरॉक्स का एक यात्रा वृतांत है, जो पहली बार 1975 में प्रकाशित हुआ था. यह 1973 में लंदन से यूरोप, मध्य पूर्व, भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के माध्यम से ट्रेन द्वारा थेरॉक्स की चार महीने की यात्रा और ट्रांस-साइबेरियन रेलवे के माध्यम से उनकी वापसी को याद करता है. पुस्तक में थेरॉक्स ने उपनिवेशवाद, अमेरिकी साम्राज्यवाद, गरीबी और अज्ञानता जैसे विषयों की खोज की. ये उनके द्वारा अनुभव किए गए स्थलों और ध्वनियों के साथ-साथ अन्य लोगों जैसे कि उनके साथी यात्रियों के साथ उनकी बातचीत में सन्निहित थे. इसमें कल्पना के तत्व जैसे स्थानों, स्थितियों और लोगों का वर्णन शामिल है, जो लेखक के अपने विचारों और दृष्टिकोण को दर्शाता है. द ग्रेट रेलवे बाजार के प्रकाशन से पहले थेरॉक्स अफ्रीका, सिंगापुर और इंग्लैंड में रहते थे.
जेल में शतरंज खेलकर समय गुजार रहा श्रद्धा का आरोपी आफताब
श्रद्धा वालकर हत्याकांड का आरोपी आफताब पूनेवाला को लेकर खबर है कि वह जेल में शतरंज खेलकर अपना समय गुजार रहा है. इस बात का खुलासा, तब हुआ जब जांच टीम अधिकारियों के साथ तिहाड़ जेल पहुंची थी. सूत्रों के हवाले से खबर है कि जब फोरेंसिक टीम तिहाड़ पहुंची थी उस समय आरोपी आफताब शतरंज खेल रहा था.
आफबात ने पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट में किया बड़ा खुलासा
श्रद्धा वालकर हत्या मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला ने पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट में कई बड़े खुलासे किये हैं. पूछताछ में आफताब ने बताया कि उसने वालकर के शव के टुकड़े करने के लिए एक छुरे का भी इस्तेमाल किया था और उसने आरी को गुड़गांव में अपने दफ्तर के पास झाड़ियों में कहीं फेंक दिया था. पूनावाला ने बताया कि उसने श्रद्धा का सिर महरौली के जंगली इलाकों में और मोबाइल फोन मुंबई में समुद्र में फेंक दिया.
आफताब ने श्रद्धा की हत्या की बात स्वीकार की
पूछताछ में आफताब ने अपनी लिव-इन-पार्टनर की हत्या की बात स्वीकार की है और यह भी कबूल किया कि दिल्ली के जंगल वाले इलाकों में विभिन्न स्थानों पर उसके शव के टुकड़े फेंके थे. हालांकि, पुलिस को अभी तक वालकर की खोपड़ी नहीं मिली है और वह अभी भी शव के अन्य हिस्सों और खोपड़ी की तलाश कर रही है.
आरोपी आफताब ने श्रद्धा की हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े किये थे
गौरतबल है कि 28 वर्षीय पूनावाला पर ‘लिव इन रिलेशन’ में रह रही वालकर की हत्या करने, उसके शव के 35 टुकड़े कर उन्हें तीन सप्ताह तक दक्षिणी दिल्ली के महरौली स्थित आवास में 300 लीटर के फ्रिज में रखने एवं शव के हिस्सों को कई दिनों में शहर के विभिन्न हिस्सों में ठिकाने लगाने का आरोप है. पूनावाला को 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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