चीन को करारा झटका : अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता, अमेरिकी संसद में प्रस्ताव पेश

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 17 Feb 2023 12:33 PM

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डेमोक्रेट पार्टी के नेता जेफ मर्कले और रिपब्लिकन नेता बिल हैगर्टी द्वारा पेश किए गए द्विदलीय प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका अरुणाचल प्रदेश राज्य को एक विवादित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देता है.

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वाशिंगटन : भारत के पड़ोसी देश चीन को अमेरिका से एक करारा झटका लगा है. अमेरिकी संसद में अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया है. अमेरिकी संसद में गुरुवार को एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया गया है. समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर ‘यथास्थिति को बदलने की’ चीन की सैन्य आक्रामकता का विरोध करते हुए अमेरिकी सीनेट में अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देने के लिए गुरुवार को एक द्विदलीय प्रस्ताव पेश किया गया.

अरुणाचल प्रदेश में चीन की हरकतों की निंदा

अमेरिकी संसद में पेश किए गए द्विदलीय प्रस्ताव में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने के लिए चीन द्वारा सैन्य बल के उपयोग, विवादित क्षेत्रों में गांवों के निर्माण, भारतीय राज्य अरुणाचल के शहरों एवं क्षेत्रों के लिए मंदारिन भाषा के नामों के साथ मानचित्रों का प्रकाशन करने तथा भूटान में चीन के क्षेत्रों के विस्तार समेत चीनी उकसावे की निंदा की गई है. प्रस्ताव में कहा गया है कि चीन अरुणाचल प्रदेश के अपना क्षेत्र होने का दावा करता है और इसे वह ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है और उसने अपनी आक्रामक और विस्तारवादी नीतियों के तहत ये दावे किए हैं.

अरुणाचल में मैकमोहन रेखा को मान्यता

डेमोक्रेट पार्टी के नेता जेफ मर्कले और रिपब्लिकन नेता बिल हैगर्टी द्वारा पेश किए गए द्विदलीय प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिका अरुणाचल प्रदेश राज्य को एक विवादित क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि भारत के अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देता है. इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष एवं सीनेटर जॉन कॉर्निन ने इस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है. सीनेट का प्रस्ताव अरुणाचल प्रदेश पर चीनी दावों का विरोध करते हुए इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिका मैकमोहन रेखा को चीन और भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता देता है.

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1914 में निर्धारित की गई थी मैकमोहन रेखा

बता दें कि मैकमोहन रेखा 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत अस्तित्व में आई थी. इस सीमारेखा का नाम भारत में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के विदेश सचिव सर हैनरी मैकमोहन के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जेफ मर्कले ने कहा कि यह प्रस्ताव स्पष्ट करता है कि अमेरिका भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश को चीन के नहीं, बल्कि भारत के हिस्से के रूप में देखता है और समान विचारधारा वाले अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के मिलकर क्षेत्र को समर्थन और सहायता देने के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता जताता है. प्रस्ताव में चीन के कारण सुरक्षा को पैदा हुए खतरे एवं उसकी आक्रामकता के खिलाफ अपनी रक्षा के लिए कदम उठाने पर भारत की सराहना की गई है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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