Coronavirus Outbreak: 'सस्ता लोन, EMI में राहत', पीएम मोदी ने थपथपाई रिजर्व बैंक की पीठ

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Mar 2020 2:29 PM

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Coronavirus Outbreak: कोरोना वायरस से भारत में अबतक 18 लोगों की मौत हो गयी है. रिजर्व बैंक ने आम लोगों को आज राहत दी है. अब लोन सस्ता होगा और EMI में राहत मिलेगी. पीएम मोदी ने रिजर्व बैंक की पीठ थपथपाई है.

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Coronavirus Outbreak: कोरोना वायरस से उत्पन्न आपदा के बीच रिजर्व बैंक ने भी मोर्चो संभाला है. केन्द्रीय बैंक ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था में नकदी की तंगी दूर करने और कर्ज सस्ता करने के लिए अपने फैरी नकदी कर्ज पर ब्याज की दर रेपो और बैंकों आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) में बड़ी कटौती जैसे कई उपायों की घोषणा की. रिजर्व बैंक के इस कदम का पीएम मोदी ने स्वागत किया है. उन्होंने रिजर्व बैंक की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक ने कोरोना वायरस के संक्रमण से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिये बड़े कदम उठाये हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया- इन घोषणाओं से बाजार में तरलता की स्थिति बेहतर होगी, कर्ज की ब्याज दरें कम होंगी तथा मध्यम वर्ग और कारोबारियों को मदद मिलेगी.

आरबीआई ने किये कर्ज सस्ता करने के बड़े उपाय

केंद्रीय बैंक ने देश व्यापी बंदी के चलते कर्ज की किस्त चुकाने में दिक्कतों को देखते हुए बैंकों को सावधिक कर्ज की वसूली में तीन माह टालने की सहूलियत दी है. इसके साथ कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान पर भी तीन माह के लिये रोक लगाने की अनुमति दी गयी है. केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि उसके सीआरआर में कटौती और नकद धन का प्रवाह बढ़ाने के कुछ अन्य उपायों से बैंकिंग जगत में 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध होगी. रिजर्व बैंक ने लोगों को आश्वास्त किया है कि देश कि बैंक व्यवस्था मजबूत है, उनका निजी बैंकों में जमा धन पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों को घबराकर पैसा निकालना नहीं चाहिए.

वित्त मंत्रालय ने की घोषणा

रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद इन उपायों की घोषणा की. यह बैठक 24, 26 और 27 मार्च को हुई. इससे पहले यह बैठक अप्रैल की शुरुआत में होनी थी. इससे एक दिन पहले ही वित्त मंत्रालय ने गरीबों, वंचितों, छोटे उद्योगों और बुजुर्गों तथा महिलाओं के लिये 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की जिसमें अगले तीन महीने तक गरीबों को राशन में पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो कोई भी दाल मुफ्त देने की घोषणा की गयी. इसके अलावा जनधन खाता धारक महिलाओं को उनके खाते में तीन महीने में 1,500 रुपये नकद और जिन परिवारों को निशुल्क रसोई गैस दी गयी उन्हें अगले तीन महीने एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने का वादा किया गया है.

क्या होता है रेपो दर और रिवर्स रेपो दर

रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 0.75 प्रतिशत घटाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया वहीं रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिशत की कमी कर इसे 4 प्रतिशत पर ला दिया. रेपो दर वह दर होती है जिसपर केन्द्रीय बैंक अल्पावधि के लिये बैंकों को नकदी उपलब्ध कराता है, वहीं रिवर्स रेपो दर के जरिये वह बाजार से अतिरिक्त नकदी को सोखता है. मौद्रिक नीति समिति के चार सदस्यों ने रेपो दर में कटौती के पक्ष में जबकि दो ने विरोध मे मतदान किया. बैंकों के पास अधिक नकदी उपलब्ध हो इसके लिये उनके नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को एक प्रतिशत घटाकर तीन प्रतिशत पर ला दिया गया.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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