राजस्थान चुनाव 2023 : सचिन पायलट को नहीं मिलेगा सीएम चेहरे का फायदा?

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 18 Nov 2023 5:20 PM

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टोंक विधानसभा क्षेत्र के सांखना गांव में चुनाव प्रचार के दौरान अजीत मेहता ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव स्थानीय बनाम बाहरी का है. पिछले चुनाव के दौरान मामला अलग था क्योंकि वह (पायलट) मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे और अपनी पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष थे.

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जयपुर : कांग्रेस के नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पार्टी ने टोंक विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. उनके मुकाबले भाजपा ने अजीत सिंह मेहता को टिकट दिया है. इस सीट पर सचिन पायलट को स्थानीय बनाम बाहरी मुद्दे का सामना करना पड़ रहा है. इस सीट से भाजपा के प्रत्याशी अजीत सिंह मेहता ने निशाना साधते हुए कहा कि सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के चेहरे का फायदा नहीं मिल पाएगा. अभी हाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टिप्पणी की थी कि पद उन्हें छोड़ नहीं रहा है. गहलोत के इस बयान का हवाला देते हुए भाजपा प्रत्याशी अजीत सिंह मेहता ने दावा किया कि इस बार के चुनाव में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री पद के चेहरे का लाभ नहीं मिल सकेगा, जैसा कि उन्हें 2018 में मिला था.

2013 से 2018 तक टोंक के विधायक रह चुके हैं अजीत सिंह मेहता

बता दें कि भाजपा प्रत्याशी अजीत सिंह मेहता 2013 से 2018 तक इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उन्हें भाजपा ने राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री पायलट से मुकाबला करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जिन्होंने 2018 में अपने भाजपा प्रतिद्वंद्वी यूनुस खान पर यहां से 54 हजार से अधिक मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी. मेहता इसे स्थानीय बनाम बाहरी की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया है कि वह टोंक निवासी हैं, जो लोगों की समस्याओं को जानते हैं, जबकि पायलट एक बाहरी व्यक्ति हैं, जिन्होंने पिछली बार मुख्यमंत्री पद का चेहरा होने का लाभ उठाते हुए बड़ी जीत हासिल की थी.

स्थानीय बनाम बाहरी का चुनाव

टोंक विधानसभा क्षेत्र के सांखना गांव में चुनाव प्रचार के दौरान अजीत मेहता ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव स्थानीय बनाम बाहरी का है. पिछले चुनाव के दौरान मामला अलग था क्योंकि वह (पायलट) मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे और अपनी पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष थे. आज वह भी विधायक बनने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं और मैं भी.

अशोक गहलोत को छोड़ नहीं रहा पद का मोह

भाजपा नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वह पद छोड़ना चाहते हैं, लेकिन पद उन्हें नहीं छोड़ रहा है. पूरा राजस्थान जानता है कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा तय है. वह सचिन पायलट विधायक बनने के लिए लड़ रहे हैं और पहली बार किसी स्थानीय व्यक्ति का सामना कर रहे हैं. उनकी यह टिप्पणी कुछ हफ्ते पहले गहलोत के दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में दिए गए उस बयान के बाद आई है, जिसमें कांग्रेस नेता ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री का पद छोड़ना चाहते हैं, लेकिन यह उन्हें नहीं छोड़ रहा है और संभवत: भविष्य में भी नहीं छोड़ेगा. यह टिप्पणी गहलोत और पायलट के बीच लंबे समय से चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच आई थी. उन्होंने सचिन पायलट पर पिछले पांच वर्षों में निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के बीच नहीं रहने का भी आरोप लगाया.

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टोंक में नहीं हुआ है विकास

अजीत सिंह मेहता ने कहा कि पिछले पांच साल में 54,000 से अधिक वोटों से जीतने के बाद सचिन पायलट ने 54 बार भी लोगों के अच्छे और बुरे समय में उनके साथ नहीं खड़े हुए. उन्होंने दावा किया हमारा विधानसभा क्षेत्र विकास से वंचित रह गया. उन्होंने कहा कि वह यहां से पांच साल तक विधायक रहे हैं और चाहे सड़क हो, पानी हो या स्वच्छता, उन्होंने लोगों को सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत की है. उन्होंने कहा कि जनता का मूड बदलाव का है और जो जनप्रतिनिधि जनता के बीच नहीं रहा और उनकी समस्याएं नहीं सुनीं, वह किस आधार पर (वोट मांगेगा)…, मुझे नहीं पता. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच वर्षों से राजस्थान के लोग कुशासन की सरकार से जूझ रहे हैं, जो भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और किसानों को धोखा देने में नंबर-1 है. खुद को स्थानीय निवासी बताते हुए मेहता ने कहा कि अगर कोई स्थानीय है तो इससे बहुत फर्क पड़ता है. विधानसभा चुनाव के तहत राजस्थान में 25 नवंबर को मतदान होगा और नतीजे तीन दिसंबर को घोषित किए जाएंगे.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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