वसुंधरा राजे के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी भाजपा ? कांग्रेस को टक्कर देने का पार्टी बनाएगी प्लान

Edited by Amitabh Kumar
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Rajasthan Election 2023 : आज के मुलाकात को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या भाजपा प्रदेश में वसुंधरा राजे को चेहरा बनाएगी या फिर पार्टी पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरे ही राजस्थान में उतारेगी. जेपी नड्डा से पूर्व सीएम की आज होगी मुलाकात

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राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले प्रदेश में पार्टी को और मजबूत करने में भाजपा जुट चुकी है. जहां एक ओर कांग्रेस बिना किसी सीएम फेस के चुनावी मैदान में उतरेगी. वहीं दूसरी ओर राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर वसुंधरा राजे आज जेपी नड्डा से मुलाकात करने वालीं हैं. इस बीच कयास लगाये जा रहे हैं कि क्या भाजपा प्रदेश में वसुंधरा राजे को चेहरा बनाएगी या फिर पार्टी पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरे ही राजस्थान में उतारेगी और उनके पिछले नौ वर्षों के कार्यों को जनता के समक्ष रखकर जनता से वोट की अपील करेगी.

इस बीच राजस्थान में भाजपा सत्तारूढ़ दल कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी ने कहा है कि राज्य की जनता प्रदेश कांग्रेस सरकार के शासन के साढ़े चार साल का हिसाब मांग रही है जिसका जवाब कांग्रेस देने में सक्षम नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के झूठे वादों से किसान परेशान हो गये हैं और आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं.

पिछले 20 साल में राजस्थान का ट्रेंड

पिछले 20 साल में राजस्थान में हुए चार विधानसभा चुनाव की बात करें तो कोई भी पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में सफल नहीं हो पायी है. इसके आधार पर यह कहा जा रहा है कि इस बार राजस्थान में भाजपा की सरकार बन सकती है. दरअसल, सत्ताधारी पार्टी के विधायक दोबारा चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनमें से ज्यादातर को हार का सामना करना पड़ता है. जनता का सबसे ज्यादा गुस्सा मंत्रियों पर निकलता है, पिछली चार सरकारों में मंत्री रहे ज्यादातर नेता अगले चुनाव में हारते नजर आये थे.

2018 के चुनाव पर एक नजर

2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो उस वक्त की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के 16 मंत्री को हार का सामना करना पड़ा था. यही नहीं 94 विधायकों को फिर से टिकट दिया गया था. इनमें से 54 हार गये थे. भाजपा ने 2018 के चुनाव में 163 विधायकों में से 94 को फिर से टिकट दिया था. इनमें से केवल 40 ने ही जीत दर्ज की थी.

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तत्कालीन वसुंधरा सरकार के मंत्री रहे 16 नेता चुनावी समर में डूब गये थे. विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वालों में युनूस खान, प्रभुलाल सैनी, राजपालसिंह शेखावत, धनसिंह रावत जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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