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रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 100 साल से अधिक पुराने और जर्जर कॉलोनियों में रहने वालों को मिलेगा नया घर

Updated at : 19 Nov 2021 9:14 AM (IST)
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रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 100 साल से अधिक पुराने और जर्जर कॉलोनियों में रहने वालों को मिलेगा नया घर

रेलवे कर्मचारियों के लिए एक खुशखबरी है. दरअसल जर्जर मकानों में रहने को मजबूर रेलवे कर्मचारियों को नया मकान मिलने वाला है. रेल मंत्रालय ने दशकों से खाली पड़ी रेलवे की जमीन पर नई बिल्डिंग और कॉलोनियां बसाने की योजना बनाई है.

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जर्जर कॉलोनियों में रहने को मजबूर रेलवे कर्मचारियों के लिए एक खुशखबरी है. केंद्र सरकार अब रेलवे की 70 साल से खाली पड़ी हजारों हेक्टेयर के जमीन पर रिहायशी क़ॉलोनियां, कॉप्लेक्स और मल्टी स्टोर बिल्डिंग बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है. जिससे लाखों रेलवे कर्मचारियों को नया घर मिलेगा. इस योजना में आम लोगों को भी फायदा पहुंचाया जाएगा. लीज की जमीन पर रियल स्टेट डेवलपर्स आम जनता को बाजार मूल्य से सस्ते पर फ्लैट बनाकर देंगे. लीज पर जमीन दिए जाने पर सरकार को करोड़ों का फायदा भी होगा.

इन जगहों पर काम शुरू

वहीं, इस योजना पर काम भी शुरु हो चुका है. रेलवे मंत्रालय का सार्वजनिक उपक्रम रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी RLD गुवाहाटी, हैदराबाद जैसे तीन स्थानों पर बसी रेलवे की कॉलोनियों को दुबारा बसाया जा रहा है.

इन राज्यों में जल्द शुरु होगा काम

वहीं, मंत्रालय दिल्ली, यूपी, बिहार, झारखंड जैसे राज्यों के कई शहरों पर नई बिल्डिंग और कॉलोनियां बसाने के लिए सर्वे के साथ साथ डीपीआर बनाने पर भी काम चल रहा है. यूपी के प्रयागराज, गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, मुरादाबाद, झांसी, आगरा जैसे जगहों पर इसे लेकर काम शुरु हो चुका है. वहीं, बिहार में पटना और झारखंड के टाटा नगर में भी निर्माण जल्द शुरु होगा.

नए साल में इन जगहों पर शुरु होगा काम

रेल लैंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश डुडेजा ने बताया कि नए साल में देशभर के 84 साइट्स तय किए गए हैं जहां पर नए बिल्डिंग बनाने का काम शुरु हो जाएगा.600 हेक्टेयर जमीन लीज पर जाएगी. 25 हजार रेलवे कर्मचारियों के लिए फ्लैट तैयार हो जाएंगे.

जर्जर मकानों में होती थी ये समस्या

100 साल से भी अधिक पुराने मकानों पर रहने वाले रेलवे कर्मचारियों की शिकायत है कि मकानों के छत में लीकेज के साथ सीमेंट शेड टूट चुका है. पानी की पाइप लाइन में गंदा पानी जम चुका है जिससे मकान कमजोर है. खिड़की दरवाजे टूट चुके हैं कई मकानों में शौचालय की शीट और बाथरुम का फर्श उखड़ चुका है. कॉलोनियों की सड़के भी खराब हो चुकी हैं.

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