राहुल गांधी ने खाली किया सरकारी आवास कहा-मैं सच बोलने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं

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राहुल गांधी ने खाली किया सरकारी आवास कहा-मैं सच बोलने के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं

राहुल गांधी ने कहा कि मुझे सच बोलने की सजा मिल रही है, लेकिन मैं सच बोलने के लिए कोई भी कीमत देने को तैयार हूं. इस मौके पर उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरे भाई ने जो कुछ कहा है वह बिलकुल सच है.

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लोकसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपना बंगला खाली कर दिया. उन्होंने बंगले की चाबी संबंधित अधिकारी को सौंप दी. इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान की जनता ने मुझे यह बंगला 19 साल तक रहने के लिए दिया, इसके लिए मैं उनका आभारी हूं.


राहुल गांधी डरने वाले नहीं हैं : प्रियंका गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि मुझे सच बोलने की सजा मिल रही है, लेकिन मैं सच बोलने के लिए कोई भी कीमत देने को तैयार हूं. इस मौके पर उनकी बहन और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरे भाई ने जो कुछ कहा है वह बिलकुल सच है. उन्होंने सरकार के बारे में जो कुछ कहा उसमें कुछ भी गलत नहीं है. अब वे सरकार के खिलाफ बोलने की सजा पा रहे हैं. लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं, वे बहुत हिम्मत वाले हैं और हम हर संघर्ष करेंगे. सच बोलने से हम डरनेवाले नहीं हैं.


राहुल गांधी के खिलाफ राजनीतिक साजिश हो रही

राहुल गांधी ने जिस वक्त तुगलक रोड स्थित अपना बंगला खाली किया, उस वक्त उनके साथ उनकी मां और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थी. हालांकि उन्होंने मीडिया से बात नहीं की. इस मौके पर कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी के साथ जो कुछ हो रहा है वो एक राजनीतिक साजिश है. वे अब इस घर को किसी को भी दे सकते हैं. लेकिन जिस तरीके से राहुल गांधी पर पीएम मोदी और अमित शाह अटैक कर रहे हैं वो पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है.

सूरत कोर्ट ने सुनायी है दो साल की सजा

गौरतलब है कि मोदीसरनेम मामले में सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता रद्द हो गयी. लोकसभा की सदस्यता समाप्त होने के बाद उन्हें सरकारी आवास खाली करने को कहा गया, जिसे राहुल गांधी ने खाली कर दिया. इससे पहले राहुल गांधी ने सूरत कोर्ट में सजा के खिलाफ अर्जी लगायी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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