तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का रास्ता हो जाएगा साफ!

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 21 Jul 2023 7:48 AM

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Rahul Gandhi's Parliament membership: यदि दोषसिद्धि पर रोक लग जाती, तो इससे राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो जाएगा. हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषसिद्धि पर रोक संबंधी राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए सात जुलाई को कहा था कि ‘राजनीति में शुचिता’ अब समय की मांग है.

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए शुक्रवार का दिन बेहद अहम है. इस दिन सुप्रीम कोर्ट गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसने हाई कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि मामले में कांग्रेस नेता की दोषसिद्धि और दो साल की जेल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुजरात हाई कोर्ट के सात जुलाई के आदेश को चुनौती देते हुए 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उन्होंने कहा है कि यदि उस आदेश पर रोक नहीं लगायी गयी तो इससे ‘‘स्वतंत्र भाषण, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, स्वतंत्र विचार और स्वतंत्र वक्तव्य’’ का दम घुट जाएगा. आपको बता दें कि गुजरात हाई कोर्ट ने ‘‘मोदी सरनेम’’ वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि के फैसले पर रोक लगाने के अनुरोध वाली उनकी याचिका सात जुलाई को खारिज कर दी थी.

क्या कहा राहुल गांधी ने अपनी याचिका में

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी याचिका में कहा है कि यदि हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगायी गयी तो यह लोकतांत्रिक संस्थानों को व्यवस्थित तरीके से, बार-बार कमजोर करेगा. इसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र का दम घुट जाएगा, जो भारत के राजनीतिक माहौल और भविष्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक साबित हो सकता है. उनकी याचिका में कहा गया है कि अत्यंत सम्मानपूर्वक यह दलील दी जाती है कि यदि विवादित फैसले पर रोक नहीं लगायी गयी, तो इससे स्वतंत्र भाषण, स्वतंत्र अभिव्यक्ति, स्वतंत्र विचार और स्वतंत्र बयान का दम घुट जाएगा.

23 मार्च को राहुल गांधी को ठहराया गया दोषी

राहुल गांधी ने कहा कि उनके बयान के लिए उन्हें दोषी ठहराने और दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार करने की गलती तीन बार की गयी है तथा यह और भी बड़ा कारण है कि शीर्ष अदालत को जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए और नुकसान को रोकना चाहिए. कांग्रेस नेता ने ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ प्रसन्ना एस. के जरिये अपील दायर करने का काम पिछले दिनों किया. गुजरात में बीजेपी के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर 2019 के मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को दोषी ठहराया था और दो साल जेल की सजा सुनायी थी.

तो राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का रास्ता हो जाएगा साफ

सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से 24 मार्च, 2023 को अयोग्य ठहराया गया था. यदि दोषसिद्धि पर रोक लग जाती, तो इससे राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का रास्ता साफ हो जाएगा. हाई कोर्ट ने इस मामले में दोषसिद्धि पर रोक संबंधी राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए सात जुलाई को कहा था कि ‘राजनीति में शुचिता’ अब समय की मांग है. न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि जनप्रतिनिधियों को स्वच्छ छवि का व्यक्ति होना चाहिए.

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा

साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि दोषसिद्धि पर रोक लगाना नियम नहीं, बल्कि अपवाद है, जो विरले मामलों में इस्तेमाल होता है. दोषसिद्धि के फैसले पर रोक लगाने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है. न्यायमूर्ति प्रच्छक ने याचिका खारिज करते हुए 125 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा था कि राहुल गांधी पहले ही देशभर में 10 मामलों का सामना कर रहे हैं और निचली अदालत का कांग्रेस नेता को उनकी टिप्पणियों के लिए दो साल कारावास की सजा सुनाने का आदेश ‘‘न्यायसंगत, उचित और वैध’’ है.

पूर्णेश मोदी ने भी सुप्रीम कोर्ट में दायर की कैविएट

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में शिकायतकर्ता भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की है. कैविएट में अनुरोध किया गया है कि अगर राहुल गांधी ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कोई याचिका दाखिल करते हैं, तो शिकायतकर्ता के पक्ष को भी सुना जाए. ‘कैविएट’ किसी वादी के द्वारा अपीलीय अदालत में दाखिल की जाती है और उसमें निचली अदालत के फैसले अथवा आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई आदेश पारित किए जाने से पहले उसके पक्ष के सुने जाने का अनुरोध किया जाता है.

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क्या है मामला

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी. यह मामला उसी से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा था कि ‘‘सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही क्यों होता है?’’ इस टिप्पणी को लेकर विधायक पूर्णेश मोदी ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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